*देवभूमि न्यूज 24.इन*
⭕इस वर्ष पितृपक्ष की शुरुआत ७ सितंबर २०२५ को पूर्णिमा के श्राद्ध से हो रही है और इसका समापन २१ सितंबर को होगा. इस दौरान लोग अपने पितरों का श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण करते हैं.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष में कुछ चीजों का खाना या कुछ विशेष कार्य करना वर्जित है, क्योंकि इनसे आपके पूर्वज अप्रसन्न हो सकते हैं और परिवार को दुष्परिणाम झेलने पड़ सकते हैं.
१. शास्त्रों में पितृपक्ष के दौरान शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, सगाई या किसी नए काम की शुरुआत करना अच्छा नहीं माना जाता है. ऐसा करने से कार्य में बाधाएं उत्पन्न होने लगती हैं और बने बनाए काम बिगड़ने की संभावना रहती है.
२. पितृपक्ष में दाढ़ी-मूंछ, बाल या नाखून काटना अशुभ माना गया है. इससे पितृ नाराज हो सकते हैं और व्यक्ति को जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

३. पितृपक्ष के दौरान किसी पशु, पक्षी या छोटे जीव-जंतु को मारना या कष्ट देना महापाप के समान है. मान्यता है कि श्राद्धों में पितृ किसी जीव के रूप में भी हमारे पास आते हैं. इसलिए उन्हें नुकसान पहुंचाना पितरों का अपमान है.
४. इस दौरान बैंगन, खीरा, मूली, अरबी, गाजर, सरसों का साग और जमीन में उगने वाली सब्जियों के सेवन से बचना चाहिए. इनमें तमो गुण अधिक होने की वजह से इन्हें नहीं खाया जाता है. इन्हें खाने से पितरों की कृपा नहीं मिलती है.
५. पितृपक्ष में चना, सत्तू, मसूर और उड़द की दाल का सेवन भी नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि इनके सेवन से पवित्रता भंग होती है और पितृदोष पैदा हो सकता है. इसके अलावा अंडा, मांस मछली आदि से भी परहेज करें.
*🚩#हरिऊँ🚩*
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