जिला मंडी शहर मुख्यालय श्री मांडव्य नगर धार में सदियों से विराजती हैं श्री महिषासुर मर्दिनी – राजीव शर्मन।

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देवभूमि न्यूज 24.इन

हिमाचल प्रदेश का जिला मंडी शहर मुख्यालय हजारों साल पुराना रियासतकालीन श्री मांडव्य नगर जनपद छोटी काशी नगर है। यहां इसी मांडव्य नगर धार जिसे कालांतर में भयावह बीएड़ जंगल और हिंसक जानवर की बहुतायत में ढांगसीधार नामकरण दिया गया। ढांगसीधार का शाब्दिक अर्थ निर्जन अरण्य है। पौराणिक मांडव्य नगर के बंगाल मूल शासकों ने इस स्थान को सुरक्षित किला मानते हुए इसी मांडव्य धार की ओट में स्थित वासणीं नामक स्थान में अपनी रियासतकालीन राजधानी स्थापित की थी। नये श्री मांडव्य नगर जनपद छोटी काशी का व्यास नदी पार राजा अजवर सेन के समय पंद्रहवीं शताब्दी में नया शहर अस्तित्व में आया।
बंगाल मूल सेन राजवंश काली माता के अनन्य शासक थे। सम्भवत: राजा सूरज सेन के शासनकाल में ही श्री मांडव्य नगर धार (ढांगसीधार) में प्राचीन श्री माता महिषासुर मर्दिनी महाशक्ति की प्रतिमा का प्रकाट्टय करवाया गया था। कोई भी सीधे तौर पर श्री महिषासुर मर्दिनी का दर्शन नहीं कर सकता था। इसके लिये सेन वंशज राजाओं ने सुरक्षात्मक दृष्टिकोण से ब्यवस्था की थी। कहते है कि यहां पूजा करने वाले पंडित-पुरोहित भी अपनी जान गवां चुके थे। इतिहास साक्षी है कि जिला मंडी शहर टारणाधार स्थित श्यामा काली टारणां माताजी के एकदम समक्ष दर्शन करने से आमजन विक्षिप्त होते थे। उग्र-ओजस्वी देवी प्रतिमा अपने तेजोमय स्वरूप से प्रभावशाली शक्तिपात करने में सर्व समर्थ मानी जाती है।अत: राजा श्याम सेन के वंशज राजा जालिम सेन ने टारणा माता का सन्मुख द्वार बदल दिया था।


यही क्रम श्री मांडव्य नगर धार (ढांगसीधार) जिला मंडी शहर मुख्यालय की महिषासुर मर्दिनी माता जी का भी दर्शन अत्यंत उग्र था। इसी क्रम में राजा सिद्ध सेन की प्राचीन सरोवर घंटाकार की सिद्ध काली का भी शिखर दोपहर में दर्शन वर्जित माना जाता था। शक्ति साधक पंडित विद्युनू चारो पहरों की भगवती की उग्र पूजा-पाठ किया करते थे। कालांतर में पंडित दुर्गा दत्त व वर्तमान में जगदीश उपाधा देवी का विधि-विधान से पूजा-पाठ करते है।
मंडी शहर में भी कांगड़ा की तरह 1905 के भूकम्प में मांडव्य नगर धार (ढांगसीधार)का प्राचीन महिषासुर मर्दिनी मंदिर पूर्णतया क्षतिग्रस्त हो गया था। इस निर्जन स्थान में सौ साल व्यतीत होने उपरांत भी किसी ने दोवारा महिषासुर मर्दिनी का नया भव्य मंदिर निर्माण करवाने की जहमत नहीं उठाई थी।

देवी-देवताओं ने भक्तों को स्वप्न में अपनी मौजदूगी के दृष्टांत दिये। परिणाम स्वरूप श्री मांडव्य नगर धार में महिषासुर मर्दिनी का भव्य मंदिर का निर्माण शीघ्रातिशीघ्र पूरा कर लिया गया।
यही नहीं श्री महिषासुर मर्दिनी मंदिर सन्निकट श्री मांडव्य पार्क का भी विस्तारीकरण कर दिया गया है। आज मांडव्य नगर जनपद व्यास नदी के सानिध्य में उच्च शिखर पर महिषासुर मर्दिनी भगवती सारे शहर को अभयदान देकर निहाल करती आई है। धार्मिक पर्यटक श्रद्धालुओं का यहां सारा साल तांता लगा रहता है। श्री मांडव्य नगर धार स्थित श्री महिषासुर मर्दिनी मंदिर के दर्शन विना जिला मंडी शहर मुख्यालय की यात्रा अधूरी मानी जाती है।
सारे शहर का मनमोहक दृश्य मांडव्य नगर धार से ही दृष्टिगोचर होता आया है। कालान्तर में श्री मांडव्य नगर धार (ढांगसीधार) श्री महिषासुर मर्दिनी माता जी के दर्शनार्थ भक्तों को टिम्बर ट्राली परियोजना से जोड़े जाने की अति आवश्यकता है। मंडी शहर के अन्य शक्ति स्थलों श्री सिद्ध गणपति मंदिर धार,टारणाधार, कांगणीं धार,गणधब्बा धार(गंधेरु पर्वत) इन शक्ति स्थलों से श्री महिषासुर मर्दिनी मंदिर के लिए टिम्बर ट्राली की सुविधा की सचमुच जोरदार मांग है।
अगर श्री महिषासुर मर्दिनी माता मंदिर श्री मांडव्य नगर धार (ढांगसीधार) को ट्राली परियोजना उपलब्ध हुई तो धार्मिक पर्यटन का कायाकल्प निश्चित है।
आजकल शरद नवरात्रि-उत्सव में श्री महिषासुर मर्दिनी मंदिर श्री मांडव्य नगर धार में देवी का पूजा-पाठ जारी है। यहां दशहरा उत्सव पर विशेष पूजा-पाठ व भंडारे का भी आयोजन सफलतापूर्वक आयोजित किया जाता है।