देवभूमि न्यूज 24.इन
लद्दाख में सरकार की हठधर्मिता की वजह से हालात बिगड़े: लद्दाख भारत का बहुत ही संवेदनशील इलाका है। भाजपा संघ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने अपने पुराने मुद्दे के मध्यनजर कश्मीर से 370 हटाने के लिए जम्मू कश्मीर के राज्य के दर्जे को खत्म कर जम्मू कश्मीर और लद्दाख दो केंद्रीय शासित प्रदेश बनाए जो कि जम्मू कश्मीर के लोगों से बहुत बड़ा अन्याय है। फिर लद्दाख के लोगों से वायदा किया गया कि लद्दाख को राज्य का दर्जा दिया जाएगा और संविधान की छठी सूची में डाला जाएगा। इसी की मांग में लद्दाखवासी पिछले 5 सालों से सोनम वांगचुक के नेतृत्व में शांति पूर्ण संघर्ष कर रहे हैं। सोनम वांगचुक का एक बहुत बड़ा मुद्दा हिमालय क्षेत्र में पर्यावरण सरंक्षण भी है। बता दें सोनम वांगचुक पर्यावरण सरंक्षण के साथ हिमालय क्षेत्र में विकास का क्या मॉडल हो इसके एक ऑथोरिटी हैं खुद वहां पर बहुत बड़ा काम कर रहे हैं उन्होंने आर्मी के लिए सोलर बंकर भी बनाए हैं जो बहुत ही सराहनीय विश्वस्तरीय काम है। वो एक बहुत ही सुलझे हुए व्यक्तित्व हैं। उन्होंने अपने सैकड़ों लोगों के साथ अपनी मांगों को लेकर लगभग एक हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा लेह से शुरू की हिमाचल प्रदेश पंजाब हरियाणा होते हुए दिल्ली प्रवेश किया। पूरे रास्ते में लोगों ने बड़े उत्साह से उनका स्वागत भी किया और समर्थन भी दिया। केंद्र सरकार की हठधर्मिता देखें कि उन्हें दिल्ली में हाउस अरेस्ट किया और उनसे किसी ने बात नहीं की।

लोकतंत्र में ऐसी उदासीनता कभी भी चुनी हुई सरकार से अपेक्षा नहीं की जा सकती। ऐसे ही सरकार ने किसानों के दिल्ली कूच को एक किस्म से रौंदने का प्रयास किया। सैकड़ों किसानों ने एक साल से ज्यादा समय तक दिल्ली के बॉर्डर पर डेरा डाला और साढ़े सात सौ किसान इस दौरान जान से हाथ धो बैठे पर देश के प्रधानमंत्री ने जहमत नहीं उठाई कि उनसे बात करें और इनकी मांगों को सहानुभूति पूर्वक सुने और हल निकालें। बाद में 3 कानून जिन्हें लेकर किसान आंदोलित थे उन्हें एक तरफा एलान कर बापिस लिया और फिर सरकार के नुमायदों ने जो आंदोलित किसानों से वायदे किए वो आज तक पूरे नहीं किए। इसी प्रकार कर्मचारी मजदूर छात्र छात्राएं यहां तक महिला पहलवानों को भी सरकार ने निराश किया है।
अब जब सोनम वांगचुक के साथ पूरे लद्दाख के लोगों ने 35 दिन भूख हड़ताल यानी अनशन शुरू किया है जो कि गांधियन शांति पूर्ण उपवास के रूप में है। इस बीच 14 दिन के बाद दो लोगों की तबियत खराब होने पर उन्हें हस्पताल भर्ती करना पड़ा तो युवाओं ने उग्र प्रदर्शन किया और आगजनी भी हुई। ऐसा सोनम वांगचुक भी नहीं चाहते हैं और उन्होंने इसे देखते हुए अपना अनशन भी तोड़ा और युवाओं से अपील की कि यह हमारे संघर्ष का रास्ता नहीं है और इसे तुरंत बंद किया जाए। युवाओं ने तुरंत इसे बंद भी किया है। इस घटना क्रम में सुरक्षा दलों की फायरिंग से 4 लोगों की मौत भी हुई और 70 के आसपास जख्मी भी हुए। यह बहुत ही चिंता का विषय है और केंद्र सरकार की नाकामी को भी दर्शाता है। अब सरकार इस सब का जिम्मा सोनम वांगचुक को ठहराने पर तुली है उन्हें जैसा यह सरकार करती आई है कि प्रेशर बना कर एक्टिविस्ट को झूठे मनघड़ंत केसों में फंसा कर यूपीए जैसे धारों में महीनों जेल में बिना किसी ट्रायल के कैद रखा जाए। यह बहुत ही केंद्र सरकार की अन्यायपूर्ण हरकत है जिसका लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है।
हमारा केंद्र सरकार विशेषकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा संघ से आग्रह है कि सरकार सोनम वांगचुक के साथ लद्दाखी आवाम से डायलॉग स्थापित कर लद्दाख का सभी पक्षों के मान्य हल निकला जाए। लद्दाख बहुत ही संवेदनशील इलाका है इसे मणिपुर की तरह बर्बाद नहीं होने देना है। जब भी कोई हालात खराब होते हैं तो केंद्र सरकार दूसरे पक्षों को दोष देते हैं खुद की नाकामी या खुद के गलत निर्णयों को छुपाते हैं यह भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों की बलि देना है।
अभी अभी खबर आई है कि केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक को युवाओं को उकसाने के आरोप में NSA के तहत अरेस्ट किया है जो कि बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है हमारा देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह है उन्हें बिना किसी शर्त रिहा किया जाए। उनसे बातचीत की जाए और लद्दाख का शांतिपूर्ण हल निकाला जाए।
जय हिंद ।
डॉ अशोक कुमार सोमल
स्वराज सत्याग्रही व पर्यावरण एवं लोकतंत्र प्रेमी
लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान