घर और मंदिर की मूर्ति का आकार क्या होना चाहिए? जानें क्या कहता है भविष्य पुराण

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 *देवभूमि न्यूज 24.इन*

🛕हिंदू धर्म मूर्ति पूजा में विश्वास करने वाला धर्म है. पुराणों में मूर्ति की बनावट व आकार का विधान है. घर व मंदिर में अलग- अलग आकार की मूर्ति होनी चाहिए.

देवी-देवताओं की मूर्ति का आकार व निर्माण विधि अनुसार होना चाहिए.,

हिंदू धर्म में मूर्ति पूजा का विशेष महत्व है. घर व मंदिरों में देव प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा कर उनका पूजन किया जाता है, पर कम ही लोग जानते हैं कि घर और मंदिर की देव प्रतिमा के निर्माण व आकार का शास्त्रों में अलग से विधान बताया गया है. जिसके अनुसार बनी मूर्ति का पूजन ही शुभ फलदायी माना गया है. आज हम आपको पुराणों में बताई मूर्ति के उसी आकार व निर्माण की विधि बताने जा रहे हैं.

🚩भगवान की मूर्ति की धातु- भविष्य पुराण व मत्स्य पुराण में भगवान की मूर्ति की शुभ धातु का उल्लेख किया गया है. भविष्य पुराण के अनुसार मूर्ति पत्थर, काठ, मिट्टी, रत्न, ताम्र या अन्य धातु की बनाई जा सकती है. इसी तरह मत्स्य पुराण के अनुसार स्वर्ण, चांदी, तांबा, पत्थर, देवदारु, लोहा, सीसा, पीतल और कांसा मिश्रित तथा शुभ काष्ठों की बनी हुई देव प्रतिमा भी शुभ मानी गई है.

🚩घर व मंदिर के अनुसार मूर्ति का आकार- भविष्य पुराण में लिखा है कि घर में आठ अंगुल से बड़ी मूर्ति नहीं होनी चाहिए. इसी तरह मंदिर में द्वार की ऊंचाई को आठ भागों में बांटकर उसके तीन भाग के माप में पिण्डिका व दो भाग के माप में देव प्रतिमा बनाने का विधान है.

84 अंगुल यानी साढ़े तीन हाथ की प्रतिमा वृद्धि करने वाली होती है. मूर्ति के निर्माण के समय उसके मुख की लंबाई 12 अंगुल तथा उसके 3 भाग के प्रमाण में चिबुक, ललाट और नाक होना चाहिए. नाक के बराबर ही कान और गर्दन बनाने चाहिए. नेत्र दो अंगुल विशाल हों. उसके तीसरे भाग में आंख की तारिका व उसके तीसरे भाग में सुंदर दृष्टि होनी चाहिए. ललाट, मस्तक और गर्दन बराबर माप की हों.

सिर का विस्तार 32 अंगुल हो तथा नासिका, मुख, गर्दन व ह्रदय एक सीध में होने चाहिए. मूर्ति की जितनी ऊंचाई हो, उसके आधे में कटी प्रदेश बनाना चाहिए. दोनों हाथ, जांघ व पेट परस्पर समान हो. टखने चार अंगुल ऊंचे, तीन अंगुल के अंगूठे वाले पैर का आकार छह अंगुल का हो. तर्जनी अंगूठे के बराबर व अन्य अंगुलियां छोटी हों. पैर की लंबाई 14 अंगुल में बनानी चाहिए. मूर्ति के हर अंग सुडौल होने चाहिए. सिर पर मुकुट व शरीर पर सुदंर आभूषण भी होने चाहिए.

🚩देवी- देवताओं की मूर्ति का आदर्श माप- भविष्यपुराण में अलग-अलग देवी-देवताओं की मूर्ति का आदर्श माप भी बताया गया है. जिसके अनुसार भगवान विष्णु व भगवती दुर्गा की मूर्ति साढ़े चार हाथ की होनी चाहिए. सूर्य की साढ़े तीन, भगवान शिव, नृसिंह व हयग्रीव की ढाई, वासुदेव, लक्ष्मी व सरस्वती की डेढ़ हाथ की प्रतिमा होनी चाहिए. मूर्ति की स्थापना तीर्थ, पर्वत, तालाब के पास या नगर के मध्य भाग में ब्राह्मणों के समूह वाले स्थान पर करनी चाहिए.

          *🚩हरिऊँ🚩*