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⭕नवरात्री कन्या पूजन २०२५: हिंदू धर्म में नवरात्रि का बहुत महत्व माना जाता है। नौ दिनों तक देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करने के बाद कन्या पूजन के साथ व्रत का समापन किया जाता है।
इसे कन्या भोज भी कहा जाता है। नवरात्रि व्रत का समापन कन्या पूजन के साथ होता है, जिसका गहरा धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व है। कई लगो अष्टमी को भी कन्या पूजन करते हैं। आइए इस दौरान कन्या पूजन के महत्व और इसे क्यों किया जाता है, इसे समझते हैं।

🪔कन्या पूजन का धार्मिक महत्व
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- शास्त्रों में कहा गया है कि कन्याएं देवी का साक्षात स्वरूप हैं।
- देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए, २ से १० वर्ष की कन्याओं को देवी मानकर उनकी पूजा करना और उन्हें भोजन कराना शुभ माना जाता है।
- कन्या पूजन देवी सिद्धिदात्री की पूजा से जुड़ा है, जिनकी पूजा नवरात्रि के अंतिम दिन की जाती है।
🪔कन्या पूजन की पौराणिक मान्यता
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देवी भागवत पुराण के अनुसार, जब देवताओं ने देवी दुर्गा से राक्षसों का नाश करने का अनुरोध किया, तो देवी ने कहा कि कन्याओं के रूप में उनकी पूजा करने से ही शक्ति प्राप्त होती है।
महिषासुर के वध के बाद, देवताओं ने कन्याओं की पूजा करके देवी दुर्गा का आभार व्यक्त किया।
तब से, कन्या पूजन के साथ नवरात्रि व्रत के समापन की परंपरा चली आ रही है।
🪔आध्यात्मिक दृष्टिकोण
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- कन्या पूजन नारी शक्ति का सम्मान है।
- कन्याओं को भोजन, वस्त्र और उपहार देकर यह संदेश दिया जाता है कि महिलाएं ब्रह्मांड की माता और पालनहार हैं।
- यह कार्य बच्चों के लिए सुख-समृद्धि, परिवार में शांति और घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
🪔कन्या पूजन विधि
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- अपने घर में ७, ९ या ११ आमंत्रित कन्याओं को स्नान कराएं और उन्हें आसन पर बैठाएं।
- उनके पैर धोएं, आचमन करें और तिलक लगाएं।
- उन्हें पूरी, चना और हलवा खिलाएं।
- कन्याओं को दक्षिणा, उपहार और लाल चुनरी भेंट करें।
- अंत में उनके चरण स्पर्श करें और उनका आशीर्वाद लें।
🪔कन्या पूजन के लाभ
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- घर में लक्ष्मी और सरस्वती का वास होता है।
- सभी प्रकार के कष्ट और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
- परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
- नवरात्रि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
*🚩जय_माता_की🚩*