एक स्त्री के पूरे जीवनचक्र का विम्ब है माँ नव दुर्गा के नौ स्वरूप

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देवभूमि न्यूज 24.इन

1.जन्म ग्रहण करती हुई कन्या माँ शैलपुत्री स्वरूप हो जाती है।

2.कौमार्य अवस्था तक माँ ब्रम्हाचारिणी स्वरूप हो जाती है।

3.विवाह से पूर्व तक चंद्रमा के समान निर्मल होने से वह माँ चंद्रघंटा स्वरूप हो जाती है।

4.नए जीव को जन्म देने के लिए गर्भ धारण करने पर वह माँ कुषमाण्डा स्वरूप हो जाती है।

5.संतान को जन्म देने के बाद वही स्त्री माँ स्कंदमाता का स्वरूप हो जाती है।

6.सयंम व साधना को धारण करने वाली स्त्री माँ कात्यायनी स्वरूप में हो जाती है।

7.अपने संकल्प से पति की अकाल मृत्यु को भी जीत लेने वाली स्त्री माँ कालरात्रि स्वरूप में हो जाती है।

8.संसार ( कुटुंब ही उसके लिए संसार है) का उपकार करने के लिए स्त्री माँ महागौरी हो जाती है।

9.धरती को छोड़कर स्वर्ग प्रयाण करने से पहले संसार मे अपनी संतान को सिद्धि (समस्त सुख संपदा) का आशिर्वाद देने वाली माँ सिद्धिदात्री हो जाती है।

हर स्त्री अपने आप मे कहीं न कहीं माँ जगदम्बे का प्रतिबिंम है। नारी शक्ति में विराजमान माँ जगदम्बे को प्रणाम !!