गुरु की नगरी पांवटा साहिब में भी शुरू होनी चाहिए पत्रकारिता जैसी महत्वपूर्ण शिक्षा।

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देवभूमि न्यूज 24.इन


आज बात करेंगे गुरु की नगरी पांवटा साहिब में उस महत्वपूर्ण शिक्षा की जिस महत्वपूर्ण शिक्षा से पांवटा साहिब क्षेत्र अभी भी वंचित हैं, जी हां वह महत्वपूर्ण शिक्षा मानीं जाती है पत्रकारिता,जिस पत्रकारिता की शिक्षा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा पांवटा साहिब महाविद्यालय में संचालित नहीं करवाई गई है, जिस शिक्षा के लिए छात्रों और युवाओं को मीलों दूर अन्य महाविद्यालयों कि और मजबूरन रुख़ करना पड़ता है। तो वहीं अगर हिमाचल विश्वविद्यालय शिमला पांवटा साहिब महाविद्यालय में पत्रकारिता की शिक्षा शुरू करवाती है तो निसंदेह पांवटा विधानसभा के साथ-साथ अन्य विधानसभा जैसे शिलाई, रेणुका जी इत्यादि के छात्रों को भी भविष्य में लाभ मिलेगा,साथ ही ऐसे अनेकों पत्रकार बन्धु जो इस क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं, परन्तु उनके पास किन्हीं कारणों से पत्रकारिता का डिप्लोमा व डिग्री उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण वह पत्रकार की श्रेणियों में नहीं मानें जातें हैं,जिनको स्थानीय रूप से इस प्रोफेशनल क्षेत्र में शिक्षा ग्रहण करने का सुअवसर प्राप्त होगा,अगर विश्वविद्यालय शिमला कोर्स शुरू करवाती है, तो वहीं मिडिया के क्षेत्र में अपना बेहतर भविष्य बनाने वाले युवाओं को भी स्थानीय स्तर पर पत्रकारिता की शिक्षा उपलब्ध होगी, जिससे अभिभावकों को आर्थिक रूप से भी कहीं न कहीं राहत मिलेगी,तो वहीं स्थानीय विधायक और वर्तमान उधोग मंत्री महोदय से निवेदन रहेगा कि पांवटा महाविद्यालय में शिक्षा मंत्री के माध्यम से पत्रकारिता की शिक्षा शुरू करवाने का प्रयास किए जाएं, ताकि भविष्य में हौनहार छात्र पत्रकारिता की उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उपरान्त प्रदेश के साथ साथ देश के प्रतिष्ठित मिडिया संस्थानों में काम करने का सौभाग्य प्राप्त होता रहें,जानकारी

अनुसार पांवटा साहिब में वर्तमान में पच्चास के क़रीब पत्रकार मानें जाते हैं, जिसमें से बहुत कम के पास पत्रकारिता की डिग्री एवं डिप्लोमा देखने एवं सुनने को मिलती है,सवाल यह नहीं कि ये पत्रकारिता नहीं कर रहे,सवाल यह है कि जब कोई पत्रकारिता के सिद्धांतों को नहीं पढ़ पाता तब तक वह न पत्रकार कहला सकता हैं और न ही अपनी खवर में पत्रकारिता के नियमों को डाल सकता है,साथ ही बिना पत्रकारिता के शिक्षा के अभाव में व्याकरण की अशुद्धियां भी देखने एवं सुनने को मिलती हैं,तो वही महात्मा गांधी ने कहा था कि शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती, इसलिए अगर शिक्षा मंत्री पत्रकारिता की शिक्षा शुरू करवाते है तो निसंदेह ऐसे तमाम पत्रकार बन्धुओं के भविष्य के रूप में यह ऐतिहासिक फैसला कहीं न कहीं मील का पत्थर साबित हो सकता है।

स्वतन्त्र लेखक-ठाकुर हेमराज राणा सिरमौर।