देवभूमि न्यूज 24.इन
जब आर्टिकल 370 में लद्दाख तक कुछ नहीं पहुंचता था.. सड़कें तक नहीं थीं..यूनिवर्सिटी नहीं थी..मोबाइल टॉवर तक नहीं थे.. कोई सरकारी स्कीम नहीं थी..
तब आंदोलन करने की हिम्मत नहीं थी इसमें..
आज जब लद्दाख को उसका पूरा हिस्सा मिल रहा है..
देश से कनेक्टिविटी हो रही है..
यूनिवर्सिटी मिल गई है..
फिर भी ये एक मोहरे की तरह काम कर रहा है..
यह तथ्य कितने लोग जानते हैं
कि
(1) सोनम वांगचुक का बाप श्रीनगर से कांग्रेस सांसद था।
विशेष बात यह है कि उसकी यह बात जानबूझकर सभी से छिपाई गई।
(2) वो इटली गया था.. ये एक षडयंत्र के तहत एक प्रायोजित यात्रा थी.. जहां सोनम वांगचुक ने तिब्बत के निर्वासित प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की थी। यह दिखाने के लिए कि लद्दाख तिब्बत का हिस्सा है?
(3) सोनम वांगचुक को भी अन्य देशद्रोहियों जैसे अमेरिका ने मैगसेसे पुरस्कार दिया है।
[ ग़ौरतलब है कि यह पुरस्कार अमेरिका सिर्फ़ उन्हें ही देता है जो अमेरिका के हितों को साधने के लिए अपने देश, धर्म और समाज से ग़द्दारी करने को सहमत हो। ]
(4) उसने 7 महीने पहले पाकिस्तान में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का दौरा किया था।
(5) नेपाल में विरोध के बाद अचानक कांग्रेस में एक नई स्फूर्ति आई है और वह भारत में कुछ करना चाहती है।

(6) सोनम वांगचुक की पत्नी अमेरिकन है.. शादी के 35 साल बाद भी उसने भारत की नागरिकता स्वीकार नहीं की है।
दरअसल अब कांग्रेस कोई राजनैतिक पार्टी नहीं रही.. वह अब भारत विरोधी देशों, संगठनों, हिंदूद्रोही, विदेशी षड्यंत्रों की स्लीपर सेल बनकर रह गई है।
सोनम वांगचुक की तत्काल गिरफ़्तारी होनी ही चाहिए थी..
यह देशद्रोही है..
उसके आक़ा की भी गिरफ़्तारी होनी चाहिए..! 😡😡
इसको 65 एकड ज़मीन सरकार ने स्कूल कॉलेज खोलने के लिए दिया था..
जो यह नहीं बना रहा था, तो सरकार ने ज़मीन आवंटन रद्द कर दिया.. तभी से ये आंदोलन कर रहा था.. और आंदोलन सफल नहीं हो रहा था इसलिए कांग्रेस के साथ मिलकर आगज़नी कर दी..!
सोनम वांगचुक के भड़काए हुए लोग कह रहे हैं कि युवाओं को नौकरी नहीं मिली..।
ये वही सोनम वांगचुक है जो ये कहकर डर फैलाता रहा है कि बड़ी कंपनियाँ लद्दाख में आ गईं तो वो ज़मीनें क़ब्ज़ा लेंगी।
यानी, इन्हें लद्दाख में कोई कंपनी भी नहीं चाहिए और इन्हें नौकरियों के लिए भी रोना है।
ये दोनों बातें कैसे संभव हैं?
अब सरकार पत्थर तोड़ने वाली नौकरी सबको तो देगी नहीं। प्रदूषण का रोना भी है, विकास भी चाहिए।
जनवरी 2023 में ही केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय के नेतृत्व में कमेटी बना दी गई थी, बातचीत के लिए..
नवंबर 2023 में कमेटी का पुनर्गठन हुआ..
मार्च 2024 में इन लोगों ने बातचीत रोक दी..
सरकार फिर भी प्रयास करती रही..
दिसंबर 2024 में बातचीत फिर से शुरू हुई और इसी वर्ष मई में ताज़ा बैठक भी हुई थी..
इस पूरे घटनाक्रम का दोषी सोनम वांगचुक है..तभी जैसे ही हिंसा हुई वैसे ही वो धरना छोड़-छाड़ कर भाग खड़ा हुआ और सुरक्षित स्थान पर लोगों के बीच छिप गया..
भारत को इजराइल के मोसाद से सीखने की सख़्त आवश्यकता है.. ताकि देशद्रोही को तुरंत सज़ा मिल सके.. इजरायल का मोसाद कोर्ट का मोहताज नहीं रहता है.. भारत सरकार को रशिया के पुतिन एवं इजरायल के नेतन्याहू की तरह साहसी होना चाहिए..!!👍