करवा चौथ के बाद पूजा में इस्तेमाल होने वाले करवा व छलनी का क्या करना चाहिए?

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*देवभूमि न्यूज 24.इन*

⭕करवा चौथ का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है। इस साल करवा चौथ व्रत 10 अक्तूबर, शुक्रवार को है। इस व्रत में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय के साथ-साथ करवा माता की पूजा का विधान है। सुहागन स्त्रियां चंद्रमा के दर्शन और उनको अर्घ्य देने के बाद अपने व्रत का पारण करती हैं। करवा चौथ को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। करवा या करक एक मिट्टी के पात्र होता है जिससे चंद्रमा को जल या अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद छलनी से चंद्र दर्शन करने की परंपरा है। इस तरह से करवा चौथ व्रत में करवा व छलनी का खास महत्व है। कई लोग पूजन के बाद करवा और छलनी को इधर-उधर रख देते हैं, जो कि अशुभ माना जाता है। जानें करवा चौथ की पूजा में इस्तेमाल होने वाले करवा व छलनी का बाद में क्या करना चाहिए।

🚩करवा चौथ पूजा के बाद करवा का क्या करना चाहिए:- करवा चौथ की पूजा के बाद करवा को अशुद्ध स्थानों या अपवित्र जगहों पर नहीं रखना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने माता पार्वती नाराज हो सकती हैं। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ की पूजा के बाद मिट्टी के करवे को पवित्र नदी या तालाब में प्रवाहित करना चाहिए। अगर आप करवा प्रवाहित नहीं कर सकते हैं तो इसे किसी पवित्र पेड़ जैसे आम, नीम, पीपल या बरगद के नीचे रख सकते हैं। कई लोग करवा अगले साल की पूजा के लिए संभाल कर भी रखते हैं, लेकिन ध्यान रखें कि पूजन में इस्तेमाल किया गया करवा हमेशा शुद्ध व स्वच्छ स्थान पर ही रखें।

🚩करवा चौथ पूजा में इस्तेमाल होने वाली छलनी का क्या करना चाहिए:- मान्यता है कि पूजा में इस्तेमाल होने वाली छलनी को संभालकर रखना चाहिए, इधर-उधर फेंकने से बचना चाहिए। इसके अलावा आप चाहें तो इसे अगले साल की पूजा में दोबारा इस्तेमाल कर सकती हैं।

         *🚩हरिऊँ🚩*