देवभूमि न्यूज नेटवर्क
राजीव शर्मन,ब्यूरो
ऊना,हिमाचल प्रदेश
अंग्रेजी शासन के दौरान उनकी ग्रीष्मकालीन भारत की राजधानी शिमला को हिमाचल प्रदेश की राजधानी बनाया गया ।
हिमाचल प्रदेश के दुर्गम जिलों से राजधानी शिमला का सफर काफी लम्बा, कठिनाईयों से भरपूर व महंगा साबित होता आया है। सर्दियों में हर साल दो महीनों तक भारी हिमपात के चलते भी शिमला राजधानी का सफर विभिन्न जिलों के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण साबित होता आया है। वर्तमान में राजधानी शिमला में बढ़ती घनी आबादी, मकानों का अत्याधिक निर्माण कार्य होने से शिमला में आवासीय सुविधाएं लगातार प्रभावित होती रही है। हिमाचल प्रदेश के कुल बारह जिलों में आधे से ज्यादा जिलों चम्बा, कांगड़ा, किन्नौर, कुल्लू, मंडी,हमीरपुर, बिलासपुर व ऊना वालों को राजधानी शिमला के लिए अत्याधिक लम्बे सफर का परिश्रम करना पड़ता है।
विगत कई दशकों से हिमाचल वासियों ने विभिन्न जिला मुख्यालयों में प्रदेश का राजधानी को स्थानांतरित करवानें का विकल्प बहुत बार सुझाया था। हिमाचल वासियों और यहां के प्रबुद्ध वर्ग ने सियासतदानों को अनेकों स्थानों का विकल्प प्रदेश की सर्व सुलभ राजधानी बनवाने की ओर इंगित कर दिया था। हुक्मरानों ने इस विषय पर बड़ी मुस्तैदी से राजधानी के बहुचर्चित मुद्दे को विराम लगाकर अंग्रेजियत की तर्ज पर कांगड़ा- धर्मशाला में करोड़ो की लागत से सर्दियों की राजधानी को साकार करा वहां हिमाचल प्रदेश की राजधानी का शीतकालीन वैकल्पिक विधानसभा सत्र चलाने की व्यवस्था से “राजधानी बदलों” आन्दोलन पर क्षणिक विराम चिन्ह लगाने में सफलतापूर्वक अस्थाई राहत प्रदान करवाई।

साल में एक पखवाड़ा अथवा एक महीना का विधानसभा सत्र चलाकर हिमाचल प्रदेश वासियों को राजधानी शिमला का कठिनाई भरा मंहगा दौर स्थाई राहत प्रदान करवाने में कोई राहत नहीं दिला पाया है। हिमाचल प्रदेश के वर्तमान परिप्रेक्ष्य में “राजधानी बदलो ” के स्वर एक बार पुन: गूंजारित होने लगे है। स्थाई तौर पर राजधानी बदलो की इस जद्दोजहद में आधे से ज्यादातर जिलों ने एक बार पुन: इस मुद्दे में सियासी गर्माहट पैदा कर दी है।
हिमाचल वासियों को स्थाई तौर पर राजधानी शिमला के दुर्गम, महंगे व हिमाच्छादित कठिनाईयों के दौर से मुक्त करवाने का नया आन्दोलन समूचे हिमाचल प्रदेश में एक बार पुन: जागृत हो गया है।
देर-सवेर प्रदेश की स्थाई राजधानी का समस्या समाधान खोजना एक बहुत बड़ी महा चुनौती है। हिमाचल वासियों की निगाहें राजधानी बदलो का स्थाई हल खोजने पर सरकार की ओर टिकी हुई है। अब देखना यह है कि हिमाचल प्रदेश सरकार धर्मशाला कांगड़ा की शीतकालीन राजधानी की ब्यवस्था करने उपरांत हिमाचलियों को स्थाई राजधानी उपलब्ध करवानें में कहां तक रोक पायेगी?