*देवभूमि न्यूज 24.इन*
⭕हिंदू धर्म में दिवाली प्रमुख त्योहारों में से एक है। हर साल कार्तिक माह की अमावस्या को दीवाली मनाई जाती है। इस साल दिवाली या दीपावली 20 अक्टूबर, सोमवार को है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को भगवान राम लंकापति रावण का वध करके और 14 वर्षों का वनवास काटकर माता सीता व भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस लौटे थे। भगवान राम का अयोध्यावासियों ने पूरे नगर में दीये जलाकर स्वागत किया था और खुशियां मनाई थीं। एक अन्य मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। दीवाली के दिन शुभ मुहूर्त में गणेश-लक्ष्मी व कुबेर जी के पूजन का विधान है। यहां जानें दीवाली गणेश-लक्ष्मी पूजा मुहूर्त, विधि व सामग्री की सूची।

🚩अमावस्या तिथि कब से कब तक 2025:- हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 03 बजकर 44 मिनट से 21 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 44 मिनट तक रहेगी।
🚩दिवाली गणेश लक्ष्मी पूजन सामग्री:- गणेश-लक्ष्मी जी की प्रतिमा या चित्र, गुलाब व कमल के फूल, चौकी, चौकी पूरने के लिए सूखा आटा, गंगाजल, घी, शक्कर, पंच मेवा, दूर्वा, गणेश-लक्ष्मी जी के वस्त्र, मिट्टी या पीतल का कलश, कलश ढकने के लिए ढक्कन, चांदी का सिक्का, तांबूल (लौंग लगा पान का बीड़ा), मिट्टी के दीये, अगरबत्ती, कपूर, धूप, तुलसी दल, इत्र की शीशी, कलावा, छोटी इलाचयी, जल पात्र, गट्टे, खील-बताशे, मुरमुरे, कलम, नारियल, सिंदूर, कुमकुम, जनेऊ, केसर, सिंघाड़े, लौंग, सरसों का तेल, लाल कपड़ा, कुबेर यंत्र, सप्तमृत्तिका, साबुत धनिया, रुई, 16 श्रृंगार व चंदन आदि।

🚩दिवाली गणेश-लक्ष्मी पूजा विधि:- दिवाली पूजन के लिए घर के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा की साफ-सफाई करें। इसके बाद यहां एक चौकी में नया या साफ लाल कपड़ा बिछाएं। अब गणेश-लक्ष्मी जी की मूर्ति स्थापित करें। सबसे पहले गंगाजल से मां लक्ष्मी व भगवान गणेश को स्नान कराएं। अब उन्हें वस्त्र, कमल या गुलाब के फूल व इत्र आदि अर्पित करें। इसके बाद भक्ति भाव के साथ एक-एक करके सभी सामग्री चढ़ाएं। अब गणेश-लक्ष्मी जी का तिलक करें और अक्षत लगाएं। अब भोग लगाने के बाद आरती उतारें और अंत में भूल चूक के लिए मांगी मांगें।

🚩दीवाली गणेश लक्ष्मी पूजन मुहूर्त 2025:- दिवाली पर गणेश-लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 07 बजकर 08 मिनट से रात 08 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। पूजन की कुल अवधि 01 घंटा 11 मिनट की है।
🚩दिवाली पर प्रदोष काल व वृषभ काल का समय:- हिंदू धर्म में लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल का समय सबसे उपयुक्त माना गया है। मान्यता है कि प्रदोष काल में मां लक्ष्मी का पूजन करने से उनका घर पर स्थाई वास होता है। दिवाली पर प्रदोष काल शाम 05 बजकर 46 मिनट से रात 08 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। वृषभ काल शाम 07 बजकर 08 मिनट से रात 09 बजकर 03 मिनट तक रहेगा।
*🚩ऊँ_श्रीगणेशाय_नम:🚩*