हम दीपावली का त्यौहार क्यूँ मनाते हैं?

Share this post

  ✍ देवभूमि न्यूज 24.इन

🌼〰️🌼〰️🌼〰️🌼〰️🌼
इसका अधिकतर उत्तर मिलता है राम जी के वनवास से लौटने की ख़ुशी में सच है पर अधूरा।

अगर ऐसा ही है तो फिर हम सब दीपावली पर भगवन राम की पूजा क्यों नहीं करते? लक्ष्मी जी और गणेश भगवन की क्यों करते हैं?

सोच में पड़ गए न आप भी।
इसका उत्तर आप तक पहुँचाने का प्रयत्न कर रहा हूँ अगर कोई त्रुटि रह जाये तो क्षमा कीजियेगा।

“दीपावली उत्सव दो युग “सतयुग” और “त्रेता युग” से जुड़ा हुआ है!”

  1. देवी लक्ष्मी जी का प्राकट्य:
    〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
    “सतयुग में समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी कार्तिक मास की अमावस्या के दिन समुन्दर मंथन में से अवतार लेकर प्रगट हुई थी! इसलिए “लक्ष्मी पूजन” होता है!
  2. भगवन विष्णु द्वारा लक्ष्मी जी को बचाना:
    〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
    भगवन विष्णु ने आज ही के दिन अपने पांचवे अवतार वामन अवतार में देवी लक्ष्मी को राजा बालि से मुक्त करवाया था।
  3. लक्ष्मी गणेश से जुडी पौराणिक कथा
    〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
    लक्ष्मी जी जब सागर मन्थन में मिलीं, और भगवान विष्णु से विवाह किया, तो उन्हें सृष्टि की धन और ऐश्वर्य की देवी बनाया गया! तो उन्होंने धन को बाँटने के लिए अधिकारी कुबेर को बनाया!

कुबेर कुछ कंजूस वृति के थे! वे धन बाँटते नहीं थे, स्वयं धन के भंडारी बन कर बैठ गए!

माता लक्ष्मी परेशान हो गई! उनकी सन्तान को कृपा नहीं मिल रही थी!

उन्होंने अपनी व्यथा भगवान विष्णु को बताई! भगवान विष्णु ने उन्हें कहा, कि “तुम अधिकारी बदल लो।”

माँ लक्ष्मी बोली, “यक्षों के राजा कुबेर मेरे परम भक्त हैं! उन्हें बुरा लगेगा।”

तब भगवान विष्णु ने उन्हें श्री गणेश जी की दीर्घ और विशाल बुद्धि को प्रयोग करने की सलाह दी। माँ लक्ष्मी ने श्री गणेश जी को “धन का विभाजन कर्ता” बनने को कहा।

श्री गणेश जी ठहरे महा बुद्धिमान! वे बोले, “माँ, मैं जिसका भी नाम बताऊंगा, उस पर आप कृपा कर देना! कोई किंतु, परन्तु नहीं! माँ लक्ष्मी ने हाँ कर दी।

अब श्री गणेश जी लोगों के सौभाग्य के विघ्न/रुकावट को दूर कर उनके लिए धनागमन के द्वार खोलने लगे। कुबेर भंडारी ही बनकर रह गए! श्री गणेश जी पैसा उपलब्ध करवाने वाले बन गए।

गणेश जी की दरियादिली देख, माँ लक्ष्मी ने अपने मानस पुत्र श्री गणेश को आशीर्वाद दिया, कि जहाँ वे अपने पति नारायण के सांग ना हों, वहाँ उनका पुत्रवत गणेश उनके साथ रहें।

दीपावली आती है कार्तिक अमावस्या को! भगवान विष्णु उस समय योगनिद्रा में होते हैं! वे जागते हैं ग्यारह दिन बाद, देव उठावनी एकादशी को।

माँ लक्ष्मी को पृथ्वी भ्रमण करने आना होता है शरद पूर्णिमा से दीवाली के बीच के पन्द्रह दिनों में, तो वे सँग ले आती हैं श्री गणेश जी को! इसलिए दीपावली को लक्ष्मी-गणेश की पूजा होती है।

  1. नरकासुर वध कृष्ण द्वारा:
    〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
    इस दिन भगवन कृष्ण ने राक्षसों के राजा नरकासुर का वध कर उसके चंगुल से 16000 औरतों को मुक्त करवाया था। इसी ख़ुशी में दीपावली का त्यौहार दो दिन तक मनाया गया। इसे विजय पर्व के नाम से भी जाना जाता है।
  2. पांडवो की वापसी:
    〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
    महाभारत में लिखे अनुसार कार्तिक अमावस्या को पांडव अपना 12 साल का वनवास काट कर वापिस आये थे जो की उन्हें चौसर में कौरवों द्वारा हराये जाने के परिणाम स्वरूप मिला था। इस प्रकार उनके लौटने की खुशी में दीपावली मनाई गई।
  3. राम जी की विजय पर
    〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
    रामायण के अनुसार त्रेता युग मे चंद्रमा के कार्तिक मास की अमावस्या के नए दिन की शुरुआत थी जब भगवान राम माता सीता और लक्ष्मण जी अयोध्या वापिस लौटे थे रावण और उसकी लंका का दहन करके। अयोध्या के नागरिकों ने पूरे राज्य को इस प्रकार दीपमाला से प्रकाशित किया था जैसा आजतक कभी भी नहीं हुआ था। इसलिए इसका नाम दीपावली है।
  4. विक्रमादित्य का राजतिलक:
    〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
    आज ही के दिन भारत के महान राजा विक्रमदित्य का राज्याभिषेक हुआ था। इसी कारण दीपावली अपने आप में एक ऐतिहासिक घटना भी है।
  5. आर्य समाज के लिए प्रमुख दिन:
    〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
    आज ही के दिन कार्तिक अमावस्या को एक महान व्यक्ति स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने हिंदुत्व का अस्तित्व बनाये रखने के लिए आर्य समाज की स्थापना की थी।
  6. जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण दिन
    〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
    महावीर तीर्थंकंर जी ने कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही मोक्ष प्राप्त किया था।
  7. सिक्खों के लिए महत्त्व
    〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
    तीसरे सिक्ख गुरु अमरदास जी ने लाल पत्र दिवस के रूप में मनाया था जिसमें सभी श्रद्धालु गुरु से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे और 1577 में अमृतसर में हरिमंदिर साहिब का शिलान्यास किया गया था।
    1619 में सिक्ख गुरु हरगोबिन्द जी को ग्वालियर के किले में 52 राजाओ के साथ मुक्त किया गया था जिन्हें मुगल बादशाह जहांगीर ने नजरबन्द किया हुआ था। इसे सिक्ख समाज बंदी छोड़ दिवस के रूप में भी जानते हैं।
  8. द पोप का दीपावली पर भाषण
    〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️
    1999 में पॉप जॉन पॉल 2 ने भारत में एक खास भाषण दिया था जिसमे चर्च को दीपावली के दीयों से सजाया गया था। पॉप के माथे पर तिलक लगाया गया था और उन्होंने दीपावली के संदर्भ में रोंगटे खड़े कर देने वाली बातें बताई।

भगवान् गणेश सभी देवो में प्रथम पूजनीय हैं इसी कारण उनकी देवी लक्ष्मी जी के साथ दीपावली पर पूजा होती है और बाकी सभी कारणों के लिए हम दीपमाला लगाकर दीपावली का त्यौहार मनाते हैं।

अब आपसे एक विनम्र निवेदन की इस जानकारी को अपने परिवार अपने बच्चों से जरूर साँझा करे । ताकि उन्हें दीपावली के महत्त्व की पूरी जानकारी प्राप्त हो सके।