*देवभूमि न्यूज 24.इन*
⭕देवशयनी एकादशी से पाताल लोक में आराम करने के लिए गए भगवान विष्णु देवउठनी एकादशी को जागते हैं और फिर से सृष्टि का संचालन संभालते हैं. इसलिए इसे देवोत्थान एकादशी या देव प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं.
इसी के साथ चातुर्मास खत्म होता है और एक बार फिर से शुभ-मांगलिक कार्य जैसे- शादी, सगाई, मुंडन, गृहप्रवेश आदि शुरू हो जाते हैं. इसलिए देवउठनी एकादशी को नए और शुभ समय की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. जानिए इस साल देवउठनी एकादशी कब है और तुलसी विवाह कब होगा?
🪔देवउठनी एकादशी कब है 2025?
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हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 1 नवंबर को सुबह 09 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 2 नवंबर को सुबह 07 बजकर 31 मिनट तक रहेगी. चूंकि 1 नवंबर को पूरे दिन एकादशी तिथि रहेगी इसलिए 1 नवंबर को ही देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी.
देवउठनी एकादशी का व्रत करना और इस दिन भगवान विष्णु व माता पार्वती की पूजा करने का बड़ा महत्व है. इससे जीवन में सुख-समृद्धि मिलती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं. इस साल देवउठनी एकादशी का पारण 2 नवंबर को किया जाएगा.
🪔अगले दिन तुलसी विवाह
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देवउठनी एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि को भगवान विष्णु के अवतार भगवान शालिग्राम और देवी तुलसी का विवाह रचाया जाता है. इस साल तुलसी विवाह 2 नवंबर को होगा.
🪔देवउठनी एकादशी पूजा विधि
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देवउठनी एकादशी से एक दिन पहले शाम को सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें. फिर एकादशी की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. इस दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है. फिर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए एकादशी व्रत का संकल्प लें. इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें, गंगाजल छिड़कें. चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. प्रतिमा का गंगाजल से स्नान कराएं. पीला चंदन, अक्षत अर्पित करें. फल, मिठाई, तुलसी दल और पंचामृत का भोग लगाएं. धूप-दीप जलाएं. एकादशी व्रत की कथा सुनें. भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें. आखिर में श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें.
*🚩हरिऊँ🚩*