श्री तुंगल घाटी (कहानी)राजीव शर्मन,ऊना

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 *देवभूमि न्यूज 24.इन*  

आज सत्तर सालों के अंतराल उपरांत तुंगल घाटी के सड़क निर्माण के मजदूर कोटली गांव में अपने समय की परिचर्चा में व्यस्त थे। इनका शुरुआती आजीविकोपार्जन व्यास नदी में मत्स्य शिकार से शुरु हुआ था। सड़क सुविधा ना होने से नगर का कठिनाई से भरपूर सफर तय करना पड़ता था।जिला मंडी शहर मुख्यालय से चांदमारी, बाड़ीगुमाणू, घेरू,कुन्नतर गांवों की ओर गर्जन करती व्यास नदी हजारों सालों से बहती आई है। इस मीलों- मील के अनवरत सफर में नदी संस्कृति गांवों के असंख्य पड़ाव आते है। पूर्वोत्तर से पश्चिमोत्तर की ओर उतरोतर बहती व्यास नदी से सटी तुंगल घाटी का दुर्गम क्षेत्रीय संघर्ष आज भी अपने लक्ष्य को साधने में संघर्षरत है। गांव की सड़क संस्कृति विस्तारीकरण के चश्मदीद गवाक्ष कुन्नतर, कोट, द्रुबल, मंढोखर,भरगांव, बडियारा, घरवाहण व तुंगल घाटी मुख्यालय के कोटली में मौजूद है। वयोवृद्ध मजदूर लाल सिंह,सवारु राम,नेकराम,ब्रेस्तू राम,कालीदास अस्सी से नब्बे साल की आयु में भी कृषक कर्म में डटे हुए है। कोटली मुख्यालय में इनका मिलन अक्सर होता रहता है। आज से सात दशक पूर्व कामरेड धनीराम ठाकुर की अगुवाई में इन सभी बुजुर्गों ने तुंगल घाटी के लिए जबरदस्त बैठकों का दौर शुरु करके विकासोन्मुखी संघर्ष का बिगुल बजाया था। उस समय कोटली मुख्यालय में तीन-चार दुकानें थी। घरवाहण में पंडित पुरशोत्तम की दुकान देहातियों की जरूरत का सामान उपलब्ध करवाने में चलती थी। पगडण्डी मार्गों से खच्चरों ,घोड़ों से सामान शहर से लाया जाता था। गांवों की पथरीली- बंजर जमीन कृषि योग्य नहीं बन पाई थी। सिंचाई व आधुनिक कृषि तकनीक का कहीं भी नामोनिशान तुंगल घाटी
में नजर नहीं आता था। इन सभी दिक्कतों से हताश निराश ग्रामीण परिवेश के युवकों को फौज में भर्ती होने के सिवा कोई अन्य साधन नजर नहीं आता था।


वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इन बुजुर्ग मजदूरों ने कोटली तुंगल नगर घाटी के शहरीकरण पर तलख टिप्पणी करते हुए आधुनिक विकासोन्मुखी कायाकल्प पर पुरानी कठिनाइयों के दौर पर मंथन किया है।

सचमुच तुंगल घाटी का मुख्यालय एक नई नगर संस्कृति की ओर अग्रसर हुआ है। सड़क चौड़ीकरण व विस्तारीकरण की समग्र क्रान्ति ने कोटली मुख्यालय को तुंगल घाटी का सिरमौर बना दिया है।
विकासोन्मुखी प्रक्रिया के पांचों मजदूर सूत्रधार लाल सिंह,सवारु, नेकराम,ब्रेस्तू राम और कालीदास आज भी भावी पीढ़ी के उज्जवल भविष्य के लिए चिंतातुर है। तुंगल घाटी के इन पांच प्यारों का कहना है कि सड़कों का जाल बिछाने से आवागमन सुगम बना है किंतु उद्योगीकरण के अभाव में यह समग्र विकास क्रान्ति नहीं है। इनका कथन है कि व्यास नदी पर आज भी तुंगल घाटी पन बिजली उत्पादन से रोजगारपरक सूत्रपात ठंडे बस्ते में है। श्री तुंगल घाटी में सैनिक स्कूल, पुलिस बटालियन, क्रिकेट स्टेडियम, रछौड़ा खड्ड झील निर्माण परियोजना समेत अनेक विकासशील कार्य अधर में लटके हुए है। कुन्नतर से जोगिन्द्रनगर को जोड़ने वाले पुलों का निर्माण युद्ध स्तर पर करवाया जाना बांछित था। तुंगल घाटी के पांच प्यारों ने दोहराया की अनेक गांवों को जोड़ने के लिये बाड़ीगुमाणू, घेरु, खड्ड कल्याणा, कुन्नतर से जोगिन्द्रनगर के लिए व्यास नदी में बड़े पुलों की जोरदार दरकार है। श्री तुंगल घाटी के सर्वांगीण विकासात्मक कायाकल्प हेतु कोटली मुख्यालय के सपलोह- लागधार, जनेत्तरी धार से कोट-कुन्नतर- जोगिन्द्रनगर के लिए ट्राली परियोजना उपलब्ध करवाने की जोरदार मांग दशकों पुरानी है। इस ट्राली परियोजना के साकार करवाने से तुगल घाटी धार्मिक सांस्कृतिक पर्यटन आदान-प्रदान में हिमाचल प्रदेश के मानचित्र पर अंकित होने के साथ-साथ रोजगारोन्मुखी कायाकल्प करवाने में बहुत बड़ा मील पत्थर साबित होने में तुंगल घाटी की विकासवादी ऐतिहासिक इबारत लिख सकता है।
इसी तरह तुंगल घाटी के वयोवृद्ध मजदूरों पांच प्यारों नें तुंगल घाटी में ब्राड गेज रेलवे लाईन शीघ्रातिशीघ्र बिछाने का भी ध्यानाकर्षण करवाया है। इन पुराने बुजुर्गो का कथन है कि हिमाचल प्रदेश ब्राड गेज रेलवे लाईन विस्तारीकरण का गढ़ तुंगल घाटी बन सकता है। मंडी जिला मुख्यालय से व्यास नदी बाड़ीगुमाणू, घेरू, खड्ड कल्याणा, कोट-कुन्नतर से हमीरपुर, कांगड़ा तक रेलवे सर्वेक्षण का प्राकृतिक खाका उपलब्ध करवाती आई है। हिमाचल प्रदेश में ब्राड गेज रेलवे लाईन शीघ्रातिशीघ्र बिछाकर और तुंगल घाटी रेलवे जंक्शन तैयार करवाने से सामरिक महत्व की रेलगाड़ियों को साकार करवाया जा सकता है। यही नहीं तुंगल घाटी कोटली की जनेत्री धार में हवाई अड्डे का निर्माण विकास क्रांति का पर्याय सिद्ध होगा।
अत: वर्तमान में वयोवृद्ध मजदूरों तुंगल घाटी के पांच प्यारों की भावनाओं का सम्मान करते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार व केंद्रीय भारत सरकार को मंडी जिला मुख्यालय की तुंगल घाटी कोटली को सचमुच विभिन्न विकासात्मक परियोजनाओं को जनहित में शीघ्रातिशीघ्र मंजूरी दिलाकर तुंगल घाटी के प्रेरणास्रोत कामरेड धनीराम ठाकुर जी व वर्तमान में मौजूद वयोवृद्ध मजदूरों का बहु-आयामी सर्वांगीण विकास साकार करवाना चाहिए।