देवभूमि न्यूज 24.इन
धरती ऊपर से जितनी शांत और खूबसूरत दिखाई देती है,उसके भीतर उतनी ही ऊर्जा और विनाश की ताकत छिपी हुई है। अमेरिका के वायोमिंग राज्य में फैले Yellowstone National Park के नीचे ऐसा ही एक सुपरवॉल्केनो सोया हुआ है जो अगर जाग गया तो पूरी दुनिया की तस्वीर बदल सकती है।
सुपरवॉल्केनो क्या होता है?
सामान्य ज्वालामुखी छोटे क्षेत्र में फटते हैं और सीमित नुकसान करते हैं। लेकिन सुपरवॉल्केनो वह होता है जो 1000 घन किलोमीटर से अधिक लावा बाहर फेंक सकता है। ऐसे विस्फोट पूरे महाद्वीप को तबाह कर सकते हैं और सूर्य की रोशनी को महीनों तक रोककर वैश्विक ठंडक (Global Cooling) ला सकते हैं। येलोस्टोन का सुपरवॉल्केनो ऐसा ही एक राक्षस है जो इस समय “सोया” हुआ है लेकिन पूरी तरह निष्क्रिय नहीं।

येलोस्टोन कहाँ है?
यह अमेरिका के वायोमिंग,मोंटाना और इडाहो राज्यों में फैला है। ऊपर से यह जगह बेहद सुंदर लगती है गर्म पानी के झरने,रंग-बिरंगे गीजर और भाप उड़ाते पहाड़,परंतु नीचे की सतह पर फैला है लावा का विशाल समुद्र। वैज्ञानिकों के अनुसार इस ज्वालामुखी के नीचे एक लावा चैंबर है जो लगभग 60 किलोमीटर लंबा और 40 किलोमीटर चौड़ा है।
अब तक के विस्फोट
पिछले 26 लाख वर्षों में येलोस्टोन तीन बार फट चुका है:
- लगभग 26 लाख साल पहले
- फिर 13 लाख साल पहले
- और आखिरी बार 640000 साल पहले
हर बार इसने इतनी राख उड़ाई कि पूरा उत्तर अमेरिका ढक गया था। कहा जाता है कि राख की मोटी परतें हजारों किलोमीटर दूर तक गिरी थीं।
अगर यह फिर फट गया तो?
- पूरा उत्तरी अमेरिका राख और धूल में डूब जाएगा।
- सूरज की रोशनी महीनों तक पृथ्वी तक नहीं पहुँचेगी।
- तापमान अचानक घट जाएगा यानी एक Mini Ice Age शुरू हो सकती है।
- फसलें बर्बाद,मौसम अनियमित और दुनिया भर में खाद्य संकट पैदा हो जाएगा।
- हवा में मौजूद राख हवाई यात्रा को असंभव बना देगी।
- NASA के वैज्ञानिकों ने यह तक कहा है कि अगर येलोस्टोन फटता है तो यह मानव सभ्यता के लिए सबसे बड़ी आपदा बन सकता है।
वैज्ञानिक निगरानी
अमेरिका की US Geological Survey लगातार इस क्षेत्र पर नज़र रख रही है। वे ज़मीन की हर छोटी हलचल,गैस उत्सर्जन और तापमान को ट्रैक करते हैं। अभी तक के आंकड़ों के अनुसार लावा की गतिविधि तो है,पर विस्फोट के कोई तत्काल संकेत नहीं हैं। हालांकि कभी-कभी यहां भूकंपों की छोटी श्रृंखलाएं आती हैं जो दर्शाती हैं कि यह ज्वालामुखी अभी भी “ज़िंदा” है।
NASA की अनोखी योजना
NASA ने एक बार प्रस्ताव दिया था कि अगर इस सुपरवॉल्केनो को धीरे-धीरे ठंडा किया जाए तो यह कभी फटेगा नहीं। इसके लिए वे नीचे ठंडा पानी इंजेक्ट करने की योजना बना रहे थे ताकि लावा का तापमान घटे। परंतु वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी कि अगर दबाव का संतुलन बिगड़ा तो यह योजना खुद एक विस्फोट की वजह बन सकती है।
डर और उम्मीद
येलोस्टोन सुपरवॉल्केनो हमें यह याद दिलाता है कि पृथ्वी एक जीवित ग्रह है जो सांस लेती है,हिलती है और बदलती है। हम इसके ऊपर रहते हैं पर इसकी गहराइयों में अब भी ऐसी शक्तियाँ मौजूद हैं जिन्हें हम पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं।
निष्कर्ष
आज भले यह ज्वालामुखी शांत दिखता हो लेकिन यह पृथ्वी की सबसे बड़ी सोई हुई शक्ति है। यह हमें बताता है धरती की सुंदरता के नीचे विनाश की चिंगारी भी छिपी है और जब यह चिंगारी जलेगी,तो शायद पूरी सभ्यता को फिर से शून्य से शुरुआत करनी पड़ेगी।