*देवभूमि न्यूज 24.इन*
⭕सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। मान्यता है कि गाय के शरीर में 33 कोटि देवी-देवता निवास करते हैं। इसी पवित्रता के कारण हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को गोपाष्टमी का त्योहार मनाया जाता है।
इस वर्ष 2025 में गोपाष्टमी 30 अक्टूबर दिन गुरुवार को मनाई जाएगी। यह पर्व भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला से जुड़ा है, जब उन्होंने पहली बार गाय चराने की शुरुआत की थी। गोपाष्टमी पर गोमाता की पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और ग्रहों की शांति मिलती है।
🪔गोपाष्टमी क्यों मनाई जाती है?
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गोपाष्टमी का मुख्य उद्देश्य गाय की सेवा है। इस दिन गाय को हरा चारा खिलाना, उनकी पूजा करना और गोशाला में सेवा करना शुभ माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार गौमाता की पूजा से सभी देवताओं की कृपा एक साथ प्राप्त होती है। ब्रज क्षेत्र (मथुरा-वृंदावन) में यह उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, जहां गोवर्धन पूजा के ठीक बाद गोपाष्टमी आती है।
🪔गोपाष्टमी की पौराणिक कथा
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स्कंद पुराण और भागवत पुराण के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण जब अपनी बाल्यावस्था में छठे वर्ष में प्रवेश किया, तब एक दिन उन्होंने माता यशोदा से कहा कि वे गाय चराना चाहते हैं। यशोदा मैया ने कहा कि पहले नंद बाबा से पूछो। जब कृष्ण ने नंद बाबा से इजाजत मांगी, तो उन्होंने कहा कि तुम अभी छोटे हो, इसलिए पहले बछड़ों को ही चराओ। लेकिन कृष्ण जी नहीं माने और जिद करने लगे।
इस पर नंद बाबा ने शांडिल्य ऋषि से गौ-चारण के लिए शुभ मुहूर्त पूछा। ऋषि ने बताया कि कार्तिक शुक्ल अष्टमी का दिन सबसे उत्तम है। उसी दिन नंद बाबा की अनुमति मिलने पर श्रीकृष्ण ने पहली बार गायों को चराने का कार्य शुरू किया। यह दिन गोपाष्टमी के रूप में प्रसिद्ध हो गया। मान्यता है कि इसी दिन से कृष्ण ‘गोपाल’ कहलाए, और गायों की रक्षा करने वाले भगवान के रूप में पूजे जाने लगे।

🪔गोपाष्टमी पूजा का महत्व
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इस दिन गौमाता की पूजा करने से कुंडली के सभी ग्रह शांत होते हैं। इसके साथ ही बुध ग्रह मजबूत होता है। गौमाता को हरा चारा खिलाने से बुद्धि, व्यापार और संचार में सफलता मिलती है। इस दिन पूजा से पाप नष्ट होते हैं, और घर में लक्ष्मी का वास होता है। यदि गौशाला नहीं जा सकते, तो दान से भी पुण्य मिलता है। यह पर्व गोवर्धन पूजा का हिस्सा माना जाता है, जहां कृष्ण ने इंद्र का मान भंग कर गोवर्धन की पूजा करवाई थी।
🪔गोपाष्टमी पूजा विधि
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30 अक्टूबर को सुबह जल्दी उठें और स्नान कर लें। स्वच्छ कपड़े पहनकर पूर्व या उत्तर दिशा में पूजा स्थल बनाएं। अगर घर में गाय है तो बढ़िया, वरना गोशाला जाएं या गाय की फोटो से काम चला सकते हैं।29 अक्टूबर सुबह 9:23 बजे से 30 अक्टूबर सुबह 10:06 बजे तक अष्टमी तिथि रहेगी। इसके साथ ही अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:45 से दोपहर 12:30 तक है। यह पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ है।
पूजन के लिए आपको गंगाजल, दूध, हल्दी, चंदन, रोली, मेहंदी, फूलमाला, हरा चारा, गुड़-चने, घी का दीपक, अगरबत्ती और कृष्ण मूर्ति की आवश्यकता होगी। गौमाता को गंगाजल से नहलाएं, हल्दी-चंदन का लेप लगाएं, रोली का तिलक करें, मेहंदी से सजाएं और फूलों की माला पहनाएं। घंटी बांधें। अब घी का दीपक जलाएं, धूपबत्ती दिखाएं और फूल-चंदन चढ़ाएं।
कृष्ण जी को माखन-मिश्री का भोग लगाएं। गौमाता को हरा चारा खिलाते हुए मंत्र बोलें – •ॐ नमो देव्यै महादेव्यै सुरभ्यै च नमो नमः – इसे •108 बार जपें। इसके साथ में •ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का भी •108 बार जाप करें। गाय की •3 या 7 बार परिक्रमा करें। अंत में आरती उतारें। भोग में गुड़-चने या रोटी-सब्जी दें, प्रसाद बांटें। शाम को अगर संभव हो तो ग्वालों के साथ थोड़ी दूर पैदल चलें। पूजा खत्म कर ब्राह्मण या जरूरतमंदों को दान दें।
*🚩ऊँ_श्रीकृष्णाय_नम:🚩*