देवभूमि न्यूज नेटवर्क
हिमाचल प्रदेश
कुल्लू/भुंतर
हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ भेदभाव और जाति प्रताड़ना के मामले चरम सीमा पर पहुंच गए हैं। इस संबंध में एक पत्र लिखकर डीणे राम ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष से कड़ा संज्ञान लेने का अनुरोध किया है।
डीणे राम ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि हिमाचल प्रदेश में आज भी जाति के आधार पर भेदभाव किया जा रहा है, जो कि हमारे संविधान के मूल्यों के विरुद्ध है। उन्होंने आयोग से अनुरोध किया है कि वह इस मामले में कड़ा संज्ञान ले और हिमाचल प्रदेश सरकार, शासन और प्रशासन को इसके विषय पर अवगत कराएं।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष की भूमिका इस मामले में बहुत महत्वपूर्ण है।

आयोग को इस मामले में जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। आयोग को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों को उनके अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के खिलाफ भेदभाव और जाति प्रताड़ना के मामले में आयोग को कड़ा संज्ञान लेना चाहिए। आयोग को इस मामले में जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। हमें उम्मीद है कि आयोग इस मामले में आवश्यक कार्रवाई करेगा और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अधिकारों और हितों की रक्षा करेगा।