देवभूमि न्यूज 24.इन
राजभवन, मुंबई में महाराष्ट्र के राज्यपाल की गरिमामय उपस्थिति में वरिष्ठ लेखक और विचारक श्री बर्जिस देसाई की नई पुस्तक ‘Modi’s Mission’ का भव्य विमोचन हुआ। यह पुस्तक प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 75 वर्षों की जीवन यात्रा, उनके व्यक्तित्व, नेतृत्व क्षमता और भारत के राजनीतिक-सांस्कृतिक परिवर्तन में उनकी भूमिका का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
लेखक ने पुस्तक को मात्र एक जीवनी नहीं, बल्कि “भारत के पुनर्जागरण की गाथा” कहा है…जहाँ एक साधारण परिवार से निकला व्यक्ति विश्व मंच पर भारत की पहचान को नई ऊँचाइयों तक ले जाता है।
पुस्तक के आरंभिक अंश में श्री मोदी के महात्मा गांधी के प्रति गहरे सम्मान का उल्लेख है। गांधीजी की तरह ही श्री मोदी जनता की चेतना को जगाने की कला जानते हैं। कोविड-19 संकट के दौरान “जनता कर्फ्यू” और लॉकडाउन के सफल क्रियान्वयन को लेखक ने उनके संचार कौशल का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है।
लेखक ने श्री मोदी के बचपन की तुलना देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विशेषाधिकारपूर्ण जीवन से करते हुए लिखा है कि एक ओर नेहरू का जीवन ऐश्वर्य में बीता, तो दूसरी ओर मोदी ने अपनी माँ को दूसरों के घर बर्तन धोते देखा। यही अनुभव, देसाई के अनुसार, उन्हें गरीबी और आम जनमानस के साथ आत्मीय रूप से जोड़ते हैं। यही जमीनी दृष्टि उनकी राजनीति की मूल प्रेरणा बनी।
पुस्तक में बताया गया है कि देश का तथाकथित “बौद्धिक अभिजात वर्ग” आज भी मोदी को समझ नहीं पाया है। 2014 से लेकर 2024 तक के तीनों आम चुनावों में भाजपा की प्रचंड जीत ने यह साबित किया कि जनता ने नरेंद्र मोदी को पूरे मन से स्वीकार किया, भले ही अभिजात वर्ग लगातार संशय में रहा।
देसाई लिखते हैं कि प्रधानमंत्री बनने के बाद श्री मोदी ने प्रशासनिक सुधारों, स्वच्छ भारत मिशन, जन धन योजना, स्मार्ट सिटीज़ और डिजिटल इंडिया जैसी पहलों से शासन व्यवस्था को नई दिशा दी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी लोकप्रियता चरम पर रही — मॉर्निंग कंसल्ट के जुलाई 2025 के सर्वे में वे लगातार 11 वर्षों से विश्व के सबसे लोकप्रिय लोकतांत्रिक नेता बने रहे, 75 प्रतिशत अनुमोदन रेटिंग के साथ।
लेखक के अनुसार, श्री मोदी ने भारतीय राष्ट्रवाद को नई परिभाषा दी है। वे धर्मनिरपेक्षता और सांस्कृतिक अस्मिता के बीच संतुलन बनाने वाले नेता के रूप में उभरे हैं। पुस्तक में उल्लेख है कि अभिजात वर्ग हिंदू सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सांप्रदायिकता के बीच अंतर नहीं कर पाता, जबकि मोदी का दृष्टिकोण सभ्यतागत भारतीय मूल्यों पर आधारित है।
पुस्तक के अंतिम अध्यायों में देसाई बताते हैं कि पिछले दशक में भारतीय मुसलमानों की सोच में सकारात्मक बदलाव आया है। मोदी सरकार की योजनाओं — उज्ज्वला, जनधन, आवास, और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण — ने सभी समुदायों को समान रूप से लाभान्वित किया है।
लेखक का कहना है कि अनुच्छेद 370 का निरसन, नागरिकता संशोधन अधिनियम और राम मंदिर का निर्माण किसी भी तरह से मुसलमानों के संवैधानिक अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालते। श्री मोदी का शासन धर्म-तटस्थ कल्याणकारी राज्य का उदाहरण है, जहाँ हर नागरिक को समान अवसर मिलते हैं।
‘Modi’s Mission’ में बर्जिस देसाई लिखते हैं कि नरेंद्र मोदी का नेतृत्व भारत में “राष्ट्रीय सोच” के एक नए युग की शुरुआत है। यह वह समय है जब सत्ता का केंद्र अभिजात वर्ग से निकलकर जनता के हाथों में आ गया है। लेखक का मानना है कि मोदी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का प्रतीक हैं — एक ऐसे युगपुरुष, जिसने देश की आत्मा को पुनः जागृत किया।