सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल में फैले भ्रष्टाचार और शोषण की सच्चाई सामने आई,अवैध प्रवेश का पर्दाफाश

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देवभूमि न्यूज नेटवर्क
आगरा / मेरठ

सत्यकाम एजुकेशनल ट्रस्ट, जो सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल की मूल संस्था है, आम जनता और मीडिया का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता है कि पूर्व प्राचार्या श्रीमती रश्मि मिश्रा द्वारा वर्तमान वैध ट्रस्टीगण के विरुद्ध एक झूठा और भ्रामक एफ.आई.आर. दर्ज कराया गया है।
यह ट्रस्ट एन.आर.आई. फंडिंग और स्वामी विवेकानंद (भोला की झील) की वैदिक शिक्षाओं और आदर्शों से प्रेरित होकर इसके संस्थापक व अध्यक्ष श्री गिरीश कुमार शर्मा द्वारा स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य शिक्षा, सत्य और सेवा का प्रतीक बनना था न कि व्यक्तिगत स्वार्थ और भ्रष्टाचार का अड्डा।
दुर्भाग्यवश, विद्यालय की बागडोर श्रीमती रश्मि मिश्रा (पूर्व प्राचार्या) और श्री अनुज शर्मा (पूर्व ट्रस्टी) के हाथों में चली गई, जिन्होंने व्यक्तिगत लाभ के लिए संस्था को हाईजैक कर लिया। अनुज शर्मा ने फर्जी पूरक ट्रस्ट डीड तैयार कर ट्रस्ट पर अवैध कब्ज़ा करने की कोशिश की, जिसका पर्दाफाश होते ही उन्हें 16 जुलाई 2025 को ट्रस्ट से और सभी पदों से हटा दिया गया।
इसके बाद से मिश्रा-शर्मा गिरोह ने झूठे मुकदमे, पुलिस दबाव, ब्लैकमेल और हिंसक भीड़ का सहारा लेकर वैध ट्रस्टीगण को बदनाम करने और गिरफ्तार करवाने की कोशिशें शुरू कर दीं। 5 अगस्त 2025 को 150 से अधिक लोगों की भीड़, जो स्कूल बसों से लाई गई थी, ने ट्रस्टियों पर हमला करने का प्रयास किया यह सब स्कूल ओनर्स एसोसिएशन के कुछ सदस्यों के समर्थन से किया गया।


हालांकि इन्हें ट्रस्ट और विद्यालय दोनों से निष्कासित कर दिया गया है, फिर भी रश्मि मिश्रा और अनुज शर्मा विद्यालय परिसर में अवैध रूप से घुसपैठ कर रहे हैं, कर्मचारियों को धमका रहे हैं और शिक्षण कार्य में बाधा डाल रहे हैं। यह अवैध अतिक्रमण (क्रिमिनल ट्रेसपास) है और पूरी तरह से कानूनी अधिकारों की अवमानना है।
उनके कार्यकाल में विद्यालय में भ्रष्टाचार और शोषण का जाल फैला हुआ था। शिक्षकों को अपनी घोषित तनख्वाह का बड़ा हिस्सा वापस करने के लिए मजबूर किया गया, ₹60,000 की सैलरी में से केवल ₹20,000 ही नकद मिलते थे और ₹40,000 का चेक वापस ले लिया जाता था यह घोटाला 2013 से लगातार चल रहा है।
इतना ही नहीं, उनके कार्यकाल में यौन शोषण और नैतिक दुराचार की चर्चाएँ मेरठ की जनता के बीच आम हो चुकी हैं। यह तो केवल बर्फ़ के पहाड़ का सिरा है असल सच्चाई इससे कहीं अधिक गहरी और भयावह है, जिसमें वित्तीय धोखाधड़ी, ब्लैकमेल और चरित्रहीनता के अनेक उदाहरण सामने आ रहे हैं।
सत्यकाम एजुकेशनल ट्रस्ट के वर्तमान ट्रस्टी अब इस संस्था को फिर से सत्य, सेवा और पारदर्शिता के मार्ग पर लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसी भावना से ट्रस्ट ने नवम्बर माह को “नो-फीस मंथ” घोषित किया है, ताकि अभिभावकों और विद्यार्थियों को आर्थिक राहत मिल सके। किंतु, रश्मि मिश्रा और अनुज शर्मा इस जनसेवा अभियान का भी विरोध कर रहे हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य केवल नियंत्रण और स्वार्थ है।
हम मीडिया और समाज से अपील करते हैं कि वे उन शिक्षकों और कर्मचारियों के साथ खड़े हों, जिन्होंने वर्षों से इस भ्रष्ट तंत्र का अत्याचार सहा है। कई शिक्षक अब भी नौकरी जाने के डर से चुप हैं, पर ट्रस्ट उन्हें पूर्ण सुरक्षा और सहायता का आश्वासन देता है।
यह भी उल्लेखनीय है कि उनके कार्यकाल में कई वर्षों से विद्यालय का ऑडिट रिपोर्ट तक प्रस्तुत नहीं किया गया, जो गंभीर वित्तीय गड़बड़ी और ट्रस्ट फंड्स के दुरुपयोग की ओर संकेत करता है।
यह संस्था एन.आर.आई. भारतीयों के परिश्रम और विश्वास से खड़ी की गई थी, जिनका उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से समाज सेवा करना था। हम इसे किसी भी कीमत पर भ्रष्टाचार, लालच और अनैतिकता का शिकार नहीं बनने देंगे।
सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल की गरिमा और पवित्रता को पुनः स्थापित किया जाएगा, और जो लोग इस ट्रस्ट को नुकसान पहुँचा रहे हैं, वे न्याय के कटघरे में अवश्य आएंगे।