देवभूमि न्यूज 24.इन
हाटी समाज के गौरव, मार्गदर्शक एवं समाज के सच्चे प्रहरी जेलदार प्रताप सिंह तोमर के आकस्मिक निधन से समूचे समाज में गहरा शोक व्याप्त है। 80 वर्ष की आयु में हृदयाघात (हार्ट अटैक) के कारण उनका निधन हो गया। कल तक पूर्णतः स्वस्थ अवस्था में रहने वाले प्रताप सिंह तोमर के अचानक इस प्रकार चले जाने की खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया है।
उनका जाना न केवल हाटी समाज, बल्कि समग्र हिमाचल प्रदेश के सामाजिक और जनआंदोलन क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। जेलदार प्रताप सिंह तोमर ने अपना संपूर्ण जीवन हाटी समाज के उत्थान, एकता और सम्मान की पुनर्स्थापना के लिए समर्पित किया। उन्होंने हमेशा दलगत राजनीति से ऊपर उठकर समाज के लिए कार्य किया और जनजातीय अधिकारों की प्राप्ति हेतु निर्णायक भूमिका निभाई।
हाटी समाज को जनजातीय दर्जा दिलाने के ऐतिहासिक आंदोलन में उनका नेतृत्व, संघर्ष और योगदान अतुलनीय रहा। उन्होंने न केवल आंदोलन को दिशा दी, बल्कि समाज के हर वर्ग, युवा, महिला, किसान और मजदूर—को एक सूत्र में पिरोकर समाज को नई पहचान और शक्ति प्रदान की। उनके नेतृत्व में “हाटी पहचान” एक लोक आंदोलन बन गया, जिसने अंततः समाज को उसका संवैधानिक अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
जेलदार तोमर की वाणी में सौम्यता थी, लेकिन उनके संकल्प में अदम्य दृढ़ता। वे सच्चे अर्थों में “हाटी के महान योद्धा” थे । जिन्होंने समाज के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनका जीवन निःस्वार्थ सेवा, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक समरसता का प्रतीक था।
प्रदेश हाटी विकास मंच के अध्यक्ष प्रदीप सिंह सिंगटा, महासचिव डॉ. अनिल भारद्वाज, संगठन महामंत्री मोहन शर्मा, प्रांत कोषाध्यक्ष एडवोकेट वी. एन. भारद्वाज, मुख्य प्रवक्ता विवेक तोमर, सतपाल चौहान, एडवोकेट रोहन तोमर, नितेश ठाकुर, सुरेंद्र ठाकुर सहित मंच के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की है।