बिहार नतीजों के बाद कांग्रेस को लेकर क्या बदलेगी सहयोगी दलों की राय?

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देवभूमि न्यूज नेटवर्क
नई दिल्ली

बिहार चुनाव के नतीजे शुक्रवार सामने आए और इन नतीजों ने तमाम अनुमानों को ध्वस्त कर दिया। बीजेपी सबसे बड़े दल के रूप में उभर कर सामने आ रही है। अब तक के आए नतीजों में एनडीए का आंकड़ा 200 के पार जाता दिख रहा है। एनडीए को ऐतिहासिक जीत मिली है वहीं महागठबंधन का प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है। एनडीए के पक्ष में ऐसी आंधी चली है कि महागठबंधन की सीटों का आंकड़ा 30 के नीचे जाता दिख रहा है। महागठबंधन में शामिल सभी दलों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। कांग्रेस की सीटें 5 से भी कम हैं तो मुकेश सहनी की पार्टी का खाता खुलता भी नहीं दिख रहा है।
नतीजों पर गौर करें तो बिहार में लगातार दूसरी बार कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। ऐसे में सवाल है कि कांग्रेस के साथ लड़कर सहयोगी दलों को फायदा है या नहीं और दूसरी तरफ यह भी प्रश्न है कि कांग्रेस को भी इसका क्या फायदा। बिहार के बाद बंगाल और यूपी का चुनाव है। बंगाल में भले ही ममता बनर्जी अकेले चुनाव लड़ती हैं लेकिन समय-समय पर कांग्रेस के साथ गठबंधन की चर्चा रहती है। वहीं देश के सबसे बड़े सियासी राज्य उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव की सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन है।
बिहार में साथ लड़कर महागठबंधन को क्या मिला
बिहार चुनाव रिजल्ट को देखकर एक सवाल जो मन में आता है कि महागठबंधन में शामिल दलों को आखिर क्या मिला। बिहार की राजनीति को थोड़ा बहुत भी समझने वाले ऐसा कह सकते हैं कि अलग-अलग भी लड़े होते तो नतीजे इससे बुरे तो नहीं होते। लगातार दूसरा चुनाव है बिहार में जब कांग्रेस का प्रदर्शन और भी खराब हुआ है। आखिरी नतीजे आने तक कहीं संख्या कांग्रेस की सबसे निचले स्तर पर न पहुंच जाए। नतीजों के बाद बिहार की राजनीति को करीब से देखने वालों का कहना है कि अलग-अलग सीटों पर ये दल लड़े होते तो नतीजे जो भी होते कम से कम कार्यकर्ताओं को मनोबल तो बढ़ा रहता। पिछले बिहार चुनाव में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन को लेकर आरजेडी के भीतर सवाल खड़े हुए थे और इस बार भी बहुत कुछ नहीं बदला है। हालांकि इस बार आरजेडी भी उस स्थिति में नहीं कि कांग्रेस पर दोष मढ़ सके।

नतीजों को देखकर क्या सोच रहे होंगे अखिलेश
बिहार नतीजों पर सबसे करीब नजर सपा मुखिया अखिलेश यादव की रही होगी। यूपी का पड़ोसी राज्य बिहार है और यहां अखिलेश यादव ने महागठबंधन के पक्ष में प्रचार भी किया था। अब बिहार नतीजों के बाद सबसे बड़ा झटका अखिलेश को ही लगा होगा। साथ ही मन में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर सवाल भी खड़े हो रहे होंगे। 2027 में यूपी का चुनाव है और अखिलेश यादव के लिए यह चुनाव काफी मायने रखता है। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और सपा दोनों ने मिलकर बेहतर प्रदर्शन किया था लेकिन विधानसभा चुनाव में अलग चुनौती सामने होगी। सपा शायद यूपी में कांग्रेस को कम महत्व दे लेकिन डर इस बात का भी रहेगा कि कांग्रेस के अलग लड़ने से नुकसान न पहुंच जाए। यूपी में कांग्रेस के लिए खोने को बहुत कुछ नहीं है लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों दल आगे कैसे बढ़ते हैं।
दूर हुआ ममता बनर्जी का कन्फ्यूजन!
अगले साल बंगाल में विधानसभा चुनाव है। इस राज्य में पहली बार कमल खिलाने के लिए बीजेपी अपना पूरा जोर लगा रही है लेकिन अब तक उसे कामयाबी नहीं मिली है। हालांकि बिहार नतीजों ने बंगाल के बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओं में जोश भर दिया है। पिछले चुनाव में बीजेपी को लगा कि राज्य में उसे सफलता मिलेगी लेकिन ऐसा हुआ नहीं। वहीं इस जीत के बाद ममता बनर्जी विपक्ष में एक मजबूत चेहरा बनकर उभरीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने इंडिया गठबंधन में रहते हुए भी कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं किया। हालांकि उसके बाद कई बार यह सवाल सामने आया कि क्या अगले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी और कांग्रेस साथ मिलकर लड़ सकते हैं। अब बिहार नतीजों के बाद ममता बनर्जी को गठबंधन को लेकर जो कन्फ्यूजन होगा शायद वह दूर हो जाए।