देवभूमि न्यूज 24.इन
ऑप्टिक एट्रोफी क्या है?हमारी आँखों से जो “नस” दिमाग तक तस्वीर पहुँचाती है, उसे ऑप्टिक नर्व कहा जाता है। अगर यह नस खराब या कमजोर हो जाए, तो आँख सही देख नहीं पाती — इसे ही ऑप्टिक एट्रोफी कहते हैं।
तंबाकू या सिगरेट से यह नस कैसे खराब होती है?
१ . जहर शरीर में जाता है – सिगरेट और तंबाकू में साइनाइड और निकोटिन जैसे ज़हरीले पदार्थ होते हैं। ये ज़हर आँख की नस की कोशिकाओं को ऑक्सीजन और ऊर्जा मिलने से रोकते हैं। जब ऊर्जा नहीं मिलती, तो नस की कोशिकाएँ धीरे-धीरे मरने लगती हैं।
२ . खून का बहाव कम हो जाता है – निकोटिन खून की नसों को सिकोड़ देता है। इससे आँख की नस तक कम खून और ऑक्सीजन पहुँचती है।
धीरे-धीरे नस कमज़ोर और पतली हो जाती है।
३ . जरूरी विटामिन की कमी – तंबाकू शरीर में विटामिन बी१२ , फोलिक एसिड, और दूसरे पोषक तत्वों की कमी कर देता है। ये विटामिन नसों की मरम्मत और सुरक्षा के लिए बहुत ज़रूरी होते हैं। जब इनकी कमी होती है, तो नस की परत उतरने लगती है और वह कमज़ोर पड़ जाती है।
४ . फ्री रैडिकल्स से नुकसान – सिगरेट के धुएँ से शरीर में फ्री रैडिकल्स (हानिकारक कण) बनते हैं। ये कोशिकाओं को ऐसे जला देते हैं या जंग लगा देते हैं, जैसे लोहे पर जंग लग जाए। इससे आँख की नस की कोशिकाएँ नष्ट होने लगती हैं।
परिणाम:
इन सभी कारणों से —
आँख की नस को ऑक्सीजन और पोषण कम मिलने लगता है, विषैले पदार्थ उसे नुकसान पहुँचाते हैं, और विटामिन की कमी से वह खुद को ठीक नहीं कर पाती।
धीरे-धीरे ऑप्टिक नर्व सूख जाती है और दृष्टि कम या स्थायी रूप से चली जाती है।
लक्षण:
धीरे-धीरे धुंधला दिखना।
रंग पहचानने में कठिनाई (खासकर लाल-हरा)।
दोनों आँखों पर असर।
कोई दर्द नहीं, पर धीरे-धीरे नज़र कम होना।
“तंबाकू आँख की नस की जड़ में जहर डाल देता है — जिससे उसे न ऑक्सीजन मिलती है, न भोजन, न सुरक्षा — और वो सूखकर कमजोर हो जाती है।”
डॉ सुमित्रा अग्रवाल
डायरेक्टर आर्टिफीसियल आई को
कोलकाता
यूट्यूब आर्टिफीसियल आई को