देवभूमि न्यूज 24.इन
आज, 27 नवंबर 2025, भारत के पहले लोकसभा अध्यक्ष, गणेश वासुदेव मावलंकर (डॉ. दादासाहेब) की जयंती है। उनका जन्म 27 नवंबर 1888 को बारोदा (वर्तमान गुजरात) में हुआ था। मावलंकर न केवल एक स्वतंत्रता सेनानी थे, बल्कि भारतीय संसदीय प्रणाली के शिल्पकार भी थे। उन्हें “लोकसभा के पिता” कहा जाता है!
उनका योगदान
1.संसदीय परंपराएं स्थापित कीं:
Question Hour शुरू किया, जहां मंत्रियों को जवाबदेही सुनिश्चित की।
Short-Notice Questions_ और Half-an-Hour Discussions जैसे नवाचार लाए।
विपक्ष को बराबरी का समय दिया, संसद को पारदर्शी बनाया।
2.नेतृत्व और शिक्षा:- 1952 में प्रथम लोकसभा अध्यक्ष बने, 27 फरवरी 1956 तक पद संभाला।
गुजरात शिक्षा सोसाइटी और गुजरात विश्वविद्यालय की स्थापना में अग्रणी भूमिका
3.निडर और निष्पक्ष:- प्रधानमंत्री नेहरू को भी नियमों का पालन सिखाया! एक बार नेहरू को बुलाने पर कहा, “आप आइए, मैं नहीं जाऊंगा” ।
विरासत
- ओम बिरला (लोकसभा अध्यक्ष, 2025) ने उन्हें श्रद्धांजलि दी, कहाउनकी दृढ़ता और निष्पक्षता आज भी संसद को प्रेरित करती है।
- उनकी तस्वीर संसद भवन (संविधान सदन) में लगाई गई, पं. नेहरू ने 1956 में अनावरण किया ।
💡 संक्षेप में: मावलंकर ने संसदीय लोकतंत्र को मजबूत किया, सामाजिक सेवा में भी अग्रणी रहे। उनकी जयंती हमें सच्ची लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाती है!