देवभूमि न्यूज 24.इन
हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर बड़े प्रोजेक्टों में देरी का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के तीन वर्ष पूरे होने को हैं, लेकिन कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार परियोजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है।जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार की कथित लेटलतीफी के चलते एयरपोर्ट विस्तार तो रुका ही है, साथ ही सेंट्रल यूनिवर्सिटी कांगड़ा का काम भी ठप पड़ा है।उन्होंने आरोप लगाया कि “30 करोड़ रुपये की राशि जारी न करना बताता है कि सरकार खुद ही इस प्रोजेक्ट की राह में रोड़ा बनी हुई है।”
धर्मशाला सत्र में जनता ने दूरी बनाई
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि कांगड़ा में आयोजित शीतकालीन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री की लोकप्रियता का “परीक्षण” हो गया।
उन्होंने दावा किया कि जनता बड़ी संख्या में मुख्यमंत्री से मिलने नहीं आई, जिसके कारण “मुख्यमंत्री को सुबह की सैर के बहाने स्कूलों के पास जाना पड़ा।”
जयराम ठाकुर ने कहा कि यह पहली बार हुआ है कि किसी मुख्यमंत्री के इतने लंबे कांगड़ा प्रवास के बावजूद जनता ने उनसे दूरी बनाए रखी। उन्होंने इसे सरकार के “रवैये और कामकाज को लेकर जनता की नाराजगी” का संकेत बताया।
भाजपा की आक्रोश रैली का उदाहरण
उन्होंने कहा कि जोरावर स्टेडियम में भाजपा की आक्रोश रैली में जनता का भारी समर्थन इस नाराजगी का प्रमाण है।
“जब जनता मुख्यमंत्री कार्यालय से दूरी बनाती है और भाजपा की रैली में उमड़ती है, तो यह बहुत कुछ कहता है।”
हमारे समय के बड़े प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के समय कांगड़ा में शुरू किए गए कई बड़े प्रोजेक्टों को कांग्रेस सरकार ने रोक दिया है।उन्होंने कहा कि
“धर्मशाला को पर्यटन राजधानी बनाने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।”
“कांगड़ा एयरपोर्ट विस्तार से पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलता, लेकिन सरकार की अनदेखी से सपना धूमिल हो रहा है।”
जयराम ने याद दिलाया कि भाजपा सरकार के समय धर्मशाला में राष्ट्रीय पर्यटन कॉन्क्लेव, ग्लोबल इन्वेस्टर मीट, तथा मुख्य सचिवों का राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर कांगड़ा को नए आयाम देने की कोशिश की गई थी।
सुक्खू सरकार से बड़े काम की उम्मीद करना बेकार
जयराम ठाकुर ने कहा कि भाजपा सांसद लगातार केंद्र में हिमाचल के मुद्दे उठा रहे हैं और कई प्रोजेक्ट जल्द धरातल पर उतरेंगे। लेकिन उन्होंने दावा किया कि
“सुक्खू सरकार ने सत्ता में आते ही 2000 संस्थान बंद कर दिए और विकास कार्यों पर ब्रेक लगा दिया, इसलिए उनसे बड़े काम की उम्मीद करना बेकार है।