देवभूमि न्यूज नेटवर्क
नई दिल्ली
लोकसभा में वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने पर हुई चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी ने तुष्टीकरण की राजनीति के दबाव में वंदे मातरम् के साथ “विश्वासघात” किया और मुस्लिम लीग के सामने झुक गई।
प्रधानमंत्री मोदी का आरोप
“कांग्रेस दबाव में वंदे मातरम के बंटवारे के लिए तैयार हुई”
प्रधानमंत्री ने कहा कि 1930 के दशक में मुस्लिम लीग द्वारा वंदे मातरम् के विरोध की राजनीति तेज होने लगी थी। उन्होंने दावा किया कि:
15 अक्टूबर 1937 को लखनऊ में मोहम्मद अली जिन्ना ने वंदे मातरम् के खिलाफ नारा बुलंद किया।
इस विरोध के बाद कांग्रेस अध्यक्ष जवाहर लाल नेहरू ने पार्टी की निष्ठा दिखाने की बजाय “गीत की समीक्षा” शुरू कर दी।
नेहरू ने 20 अक्टूबर को सुभाष चंद्र बोस को पत्र लिखा और जिन्ना की आपत्तियों से सहमति जताते हुए कहा कि यह गीत मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है।
पीएम मोदी ने कहा कि नेहरू द्वारा लिखे गए इस पत्र में उल्लेख था कि उन्होंने वंदे मातरम् का बैकग्राउंड पढ़ा है और उन्हें लगता है कि इससे “मुस्लिम भड़क सकते हैं”।
कांग्रेस ने वंदे मातरम के टुकड़े कर दिए”प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने दावा किया कि
कांग्रेस ने 26 अक्टूबर 1937 से वंदे मातरम् की समीक्षा करने का फैसला किया।
इस कदम से देशभर में हैरानी और विरोध पैदा हुआ, लोगों ने प्रभात फेरियां निकालीं।
कांग्रेस ने “सामाजिक सद्भाव” का हवाला देकर समझौता कर लिया और वंदे मातरम् के हिस्सों को अलग कर दिया।
मोदी ने कहा,
दुर्भाग्य है कि कांग्रेस ने वंदे मातरम् पर समझौता किया, इसके टुकड़े कर दिए और मुस्लिम लीग के सामने घुटने टेक दिए।
लोकसभा में गरमाया माहौल
प्रधानमंत्री के इन आरोपों के बाद सदन में माहौल गर्म हो गया। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। वंदे मातरम् के ऐतिहासिक संदर्भ, स्वतंत्रता संग्राम में उसकी भूमिका और आज के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में उसके महत्व पर भी सदन में चर्चा हुई।