✍️ देवभूमि न्यूज 24.इन
- भगवान श्रीगणेश को शमी पत्र चढ़ाकर ‘सुमुखाय नम:’ कहें। इसके बाद क्रम से यह पत्ते चढ़ाएं और नाम मंत्र बोलें –
- बिल्वपत्र चढ़ाते समय जपें ‘उमापुत्राय नम:।’
- दूर्वादल चढ़ाते समय जपें ‘गजमुखाय नम:।’
- बेर चढ़ाते समय जपें ‘लंबोदराय नम:।’
- धतूरे का पत्ता चढ़ाते समय जपें ‘हरसूनवे नम:।’
- सेम का पत्ता चढ़ाते समय जपें ‘वक्रतुंडाय नम:।’
- तेजपत्ता चढ़ाते समय जपें ‘चतुर्होत्रे नम:।’
- कनेर का पत्ता चढ़ाते समय जपें ‘विकटाय नम:।’
- कदली या केले का पत्ता चढ़ाते समय जपें ‘हेमतुंडाय नम:।’
- आक का पत्ता चढ़ाते समय जपें ‘विनायकाय नम:।’
- अर्जुन का पत्ता चढ़ाते समय जपें ‘कपिलाय नम:।’
- महुआ का पत्ता चढ़ाते समय जपें ‘भालचन्द्राय नम:।’
- अगस्त्य वृक्ष का पत्ता चढ़ाते समय जपें ‘सर्वेश्वराय नम:।’
- वनभंटा चढ़ाते समय जपें ‘एकदंताय नम:।’
- भंगरैया का पत्ता चढ़ाते समय जपें ‘गणाधीशाय नम:।’
- अपामार्ग का पत्ता चढ़ाते समय जपें ‘गुहाग्रजाय नम:।’
- देवदारु का पत्ता चढ़ाते समय जपें ‘वटवे नम:।’
- गांधारी वृक्ष का पत्ता चढ़ाते समय जपें ‘सुराग्रजाय नम:।’
- सिंदूर वृक्ष का पत्ता चढ़ाते समय जपें ‘हेरम्बाय नम:।’
- केतकी पत्ता चढ़ाते समय जपें ‘सिद्धिविनायकाय नम:।’
आखिर में दो दूर्वादल गंध, फूल और चावल गणेशजी को चढ़ाना चाहिए।
✍️ज्यो:शैलेन्द्र सिंगला पलवल हरियाणा mo no/WhatsApp no9992776726
नारायण सेवा ज्योतिष संस्थान