देवभूमि न्यूज 24.इन
लोकसभा में आज गृहमंत्री अमित शाह ने अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया देते हुए SIR (Special Identification Register) पर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों और आरोपों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि संसद में SIR पर चर्चा संभव नहीं है, क्योंकि यह विषय संविधान के अंतर्गत चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है।
अमित शाह ने कहा—
“हम NDA वाले चर्चा से नहीं भागते”
“विपक्ष गुमराह करने का काम कर रहा है”
“कांग्रेस ने जो झूठ फैलाया है, उसका जवाब देना पड़ेगा”
उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष SIR को लेकर भ्रम फैला रहा है, जबकि चुनाव आयोग (ECI) एक पूर्णतः स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था है। उन्होंने संवैधानिक प्रावधानों का ज़िक्र करते हुए स्पष्ट किया
अनुच्छेद 326: मतदाता की पात्रता तय करता है और यह स्पष्ट है कि वोट देने के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है।
अनुच्छेद 324: चुनाव आयोग को विशेष अधिकार प्रदान करता है, जिसके तहत मतदाता सूचियां तैयार करना और उनमें सुधार करना पूर्णतः ECI की जिम्मेदारी है।
गृहमंत्री ने कहा कि देश समाज को आगे बढ़ाने के लिए इतिहास से सीख लेता है, लेकिन उसी में अटका नहीं रह सकता। उन्होंने दो टूक कहा कि देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को घुसपैठिए तय नहीं कर सकते, इसलिए मतदाता सूची का पारदर्शी और सटीक होना आवश्यक है।
अमित शाह ने यह भी बताया कि:
सबसे पहला SIR वर्ष 1952 में हुआ था।
2004 तक किसी भी राजनीतिक दल ने SIR का विरोध नहीं किया था।
2004 के बाद अब 2025 में SIR प्रक्रिया हो रही है, जो पूरी तरह संवैधानिक है और चुनाव आयोग की निगरानी में चल रही है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि सरकार और NDA गठबंधन लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती के लिए कटिबद्ध हैं, और इसलिए जनता को गुमराह करने वाले हर आरोप का तथ्यात्मक जवाब दिया जाएगा।