देवभूमि न्यूज नेटवर्क
नई दिल्ली
संसद में चुनाव सुधार (SIR) पर दो दिनों से चली बहस के दौरान सरकार और विपक्ष आमने-सामने रहे। विपक्ष ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर से चुनाव कराने, और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति समिति में राज्यसभा के विपक्ष के नेता व मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने की मांग रखी।
बुधवार को गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि “घुसपैठिए तय नहीं कर सकते कि देश का मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री कौन होगा। यह अधिकार सिर्फ भारत के नागरिकों का है।” शाह ने दावा किया कि केंद्र सरकार सभी घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।
“मोदी को देश ने PM बनाया है, विपक्ष की कृपा से नहीं”
अमित शाह ने विपक्ष पर बिना तथ्यों के आरोप लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव सुधार पर हो रहा विवाद निराधार है और SIR का आधार सुप्रीम कोर्ट का फैसला है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि“नरेंद्र मोदी को देश की जनता ने चुना है, विपक्ष की कृपा से नहीं।”
शाह ने कहा कि वोटर बनने की पहली शर्त भारतीय नागरिक होना है और यह चुनाव आयोग का दायित्व है कि वह तय करे कि कौन मतदाता है और कौन नहीं।
इतिहास का हवाला देकर विपक्ष के आरोपों पर निशाना
सरकार पर लगे वोट चोरी के आरोपों का जवाब देते हुए शाह ने इतिहास के दो प्रसंग गिनाए
आज़ादी के बाद प्रधानमंत्री चयन के समय सरदार पटेल को 28 वोट और नेहरू को 2 वोट, फिर भी PM नेहरू बने इसे शाह ने “वोट चोरी का उदाहरण” बताया।
दूसरा उदाहरण इंदिरा गांधी के 1975 के दौर का दिया, जब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनका चुनाव रद्द किया था।
शाह ने कहा कि सोनिया गांधी के नागरिकता और मतदाता सूची वाले मामले में भी अदालत निर्णय लेगी“यहां क्यों जवाब दूं?”
राहुल गांधी बनाम अमित शाह संसद में तीखा मुकाबला
राहुल गांधी ने शाह पर “वोट चोरी का नैरेटिव” खारिज करने के बजाय बचाव करने का आरोप लगाया और उन्हें खुली बहस की चुनौती दे दी।
इस पर शाह ने पलटकर कहा कि
“आपके हुक्म से संसद नहीं चलेगी। मैं अपने भाषण का क्रम स्वयं तय करूंगा।”
विपक्ष का वाकआउट
गृहमंत्री के जवाब से नाराज़ विपक्ष सदन से वाकआउट कर गया। बाहर आकर राहुल गांधी ने कहा“उन्होंने हमारे सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।”
“मैंने पारदर्शी वोटर लिस्ट, ईवीएम की तकनीकी संरचना और हरियाणा-बिहार में भाजपा नेताओं के वोट डालने की बात उठाई पर वह चुप रहे।”
प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी
“डेढ़ घंटे तक सिर्फ सफाई दी। अगर कोई बेगुनाह होता, तो क्या इतनी सफाई देता?”