देवभूमि न्यूज नेटवर्क
नई दिल्ली
हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने संसद में हिमाचल प्रदेश में अवैध खनन और टिंबर माफिया की गतिविधियों को आपदाओं का एक बड़ा कारण करार देते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं अपने स्थान पर हैं, लेकिन माफिया गतिविधियों ने नदियों के तटीकरण और जलधाराओं के प्रवाह को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे बाढ़ और भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
हिमाचल को तटीकरण के लिए 8625 करोड़ का आबंटन
प्रश्नकाल के दौरान अनुराग ठाकुर ने केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से पूछा कि हिमाचल प्रदेश में तटीकरण और क्षतिग्रस्त तटीय संरचनाओं के पुनर्निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने कितनी राशि जारी की है।
जवाब में जलशक्ति मंत्री ने बताया कि
केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को तटीकरण कार्यों के लिए कुल 8,625 करोड़ रुपये आबंटित किए हैं।
यह राशि केवल क्षतिग्रस्त संरचनाओं के पुनर्निर्माण के लिए ही नहीं, बल्कि नई चैनलाइजेशन परियोजनाओं के लिए भी उपलब्ध करवाई गई है।
अवैध खनन व टिंबर माफिया से बढ़ रहा आपदा का खतरा
अनुराग ठाकुर ने कहा कि पिछले दो-तीन वर्षों में प्रदेश ने भीषण बाढ़, फ्लैश फ्लड और क्लाउडबर्स्ट की कई घटनाओं का सामना किया, जिससे प्रदेश की प्राकृतिक संपदा और ग्रामीण ढांचे को भारी नुकसान हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि
अवैध खनन माफिया और टिंबर माफिया ने नदियों का स्वरूप बिगाड़ा।
प्राकृतिक जलधाराओं से छेड़छाड़ के कारण भारी वर्षा के समय पानी का दबाव कई गुना बढ़ गया, जिसके परिणामस्वरूप विनाशकारी बाढ़ आई।
उन्होंने कहा कि पूरे देश ने देखा कि बाढ़ के समय किस तरह “पुष्पा फिल्म की तरह हजारों कटे पेड़ नदियों में बहते नजर आए,” जो टिंबर माफिया की सक्रियता का प्रमाण है।
अनुराग ठाकुर ने मांग की कि प्रदेश के तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा, नदियों के मूल प्रवाह की बहाली और माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई को तत्काल प्राथमिकता में रखा जाए, ताकि भविष्य में आपदाओं की तीव्रता कम हो सके।