देवभूमि न्यूज 24.इन
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक और दूरगामी असर वाला फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि हिन्दू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति SC/ST/OBC आरक्षण का लाभ नहीं ले सकते। कोर्ट ने कहा कि धर्म परिवर्तन के बावजूद स्वयं को अनुसूचित जाति बताकर आरक्षण का लाभ लेना संविधान के साथ धोखा है।
यह फैसला उस मामले में आया है जिसमें जितेंद्र साहनी पर आरोप था कि वह ईसाई प्रार्थना सभा के नाम पर लोगों को लालच देकर धर्मांतरण करा रहे थे और हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करते थे। गवाहों के अनुसार वे स्वयं ईसाई धर्म अपना चुके थे, लेकिन कोर्ट में उन्होंने खुद को हिंदू बताया।
💥 हाईकोर्ट के मुख्य आदेश
धर्म परिवर्तन के बाद SC दर्जा नहीं मिलेगा
कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति हिंदू धर्म छोड़ देता है, तो वह अनुसूचित जाति का दर्जा स्वाभाविक रूप से खो देता है।
धर्म छुपाकर आरक्षण लेना अपराध
कोर्ट के अनुसार धर्म छिपाकर आरक्षण लाभ लेना संविधान और कानून दोनों का उल्लंघन है।
जिलाधिकारियों को जांच का आदेश
प्रदेश के सभी डीएम को निर्देश दिया गया है कि ऐसे मामलों की जांच करें जहां लोग हिंदू धर्म छोड़ने के बावजूद SC/ST/OBC लाभ ले रहे हों
पूरी रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजें
गलत हलफनामा देने पर कार्रवाई
कोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने धर्म परिवर्तन छुपाया है या हलफनामे में गलत जानकारी दी है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
हाईकोर्ट के इस फैसले को आरक्षण व्यवस्था की पारदर्शिता और संविधान की मूल भावना की रक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह निर्णय आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश और देशभर में कई मामलों को प्रभावित कर सकता है।