दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है।

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देवभूमि न्यूज 24.इन


मामला है कि 1980–81 के मतदाता सूची में सोनिया गांधी का नाम शामिल था, जबकि आरोप है कि उन्होंने भारतीय नागरिकता 1983 में प्राप्त की थी यानी नागरिकता मिलने से पहले ही उनका नाम वोटर लिस्ट में दर्ज हो गया था।
याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता का कहना है कि 1982 में उनका नाम हटाया गया, लेकिन 1983 में लौटाया गया। उन्होंने दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की भी मांग की है।
कोर्ट ने इस याचिका पर संज्ञान लिया है यानी पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट में खारिज की गई याचिका पर पुनर्विचार हो रहा है।
अगली सुनवाई की तारीख तय और जवाब मांगा गया है।
क्या साबित हुआ हैअभी नहीं
अभी तक किसी अदालत ने फैसला नहीं सुनाया है कि आरोप साबित भी हुए हैं या नहीं। यह सिर्फ नोटिस जारी करना है मामले की आगे की जांच और सुनवाई बाकी है।
पहले एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 2025 में ही इस शिकायत को खारिज किया था।
याचिकाकर्ता पीठासीन न्यायालय के फैसले को रद्द कराने की मांग कर रहा है। नोटिस जारी हुआ है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दोष तय हो गया है।
*राजनीतिक और विधिक मायने
यह मामला संवेदनशील है क्योंकि वोटर लिस्ट व नागरिकता से जुड़े नियमों का उल्लंघन हो सकता है। अगर आरोप साबित हुए, तो यह चुनावी कद व वैधता से जुड़ा विवाद बन सकता है।
दूसरी ओर, इस याचिका को खारिज कर देने वाला मजिस्ट्रेट कोर्ट पहले ही कह चुका था कि शिकायत “बेहिसाब दावों” पर आधारित थी।
अब रिवीजन पिटीशन पर विशेष अदालत (सेशन्स कोर्ट) ने नोटिस जारी किया है, जिससे याचिकाकर्ता को मौका मिल गया है, लेकिन यह तय नहीं कि कोर्ट किसी नई सुनवाई या एफआईआर दर्ज करेगी या नहीं।