घुमारवीं में सीएम सुक्खू का बड़ा ऐलान: भाखड़ा विस्थापितों के लिए बनेगी नई पॉलिसी

Share this post

देवभूमि न्यूज 24.इन

बिलासपुर | घुमारवीं

घुमारवीं में आयोजित हिमाचल प्रदेश पेंशनर्ज ज्वाइंट फ्रंट के राज्य स्तरीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भाखड़ा बांध विस्थापितों के दर्द को साझा करते हुए उनके हित में नई पॉलिसी लाने का संकेत दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाखड़ा विस्थापित पट्टाधारक नहीं हैं, इसलिए उन्हें उनकी जमीन पर मालिकाना हक मिलना चाहिए। राज्य सरकार इस दिशा में गंभीरता से विचार कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विस्थापितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है और उन्हें उनका अधिकार दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि बीबीएमबी से हिमाचल का हक दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही है। हिमाचल प्रदेश से निकलने वाली पांच नदियां पूरे उत्तर भारत को सींचती हैं और इन पर पहला अधिकार हिमाचल का बनता है।

सीएम सुक्खू ने पूर्व सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार 75 हजार करोड़ रुपये का कर्ज और करीब 10 हजार करोड़ रुपये की देनदारियां छोड़ गई है। जनता के पैसे का दुरुपयोग हुआ, जिसके कारण वर्तमान सरकार को सत्ता में आने के बाद कुछ कड़े फैसले लेने पड़े।

उल्लेखनीय है कि भाखड़ा बांध निर्माण के दौरान विस्थापित हुए लोगों को आज तक अपनी ही जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला। पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में 150 वर्ग मीटर तक के अवैध कब्जों को रेगुलर करने की पॉलिसी बनी थी, लेकिन प्रक्रिया बाद में ठप हो गई। अब वर्तमान सरकार से विस्थापितों को मालिकाना हक मिलने की उम्मीद जगी है।

प्रदेश में बनेगा आईएफएस कैडर

सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने ऐलान किया कि हिमाचल प्रदेश में भारतीय वन सेवा (IFS) का अलग कैडर बनाया जाएगा। वर्तमान में आईएफएस अधिकारियों की संख्या सौ से अधिक है, जिसके चलते 86 अधिकारियों का कैडर गठित किया जाएगा।

पेंशनर्ज से भावुक संवाद

सीएम सुक्खू ने पेंशनर्ज को संबोधित करते हुए कहा कि वह उनके दर्द और पीड़ा को समझते हैं, क्योंकि उनके पिता स्वयं पेंशनर हैं। पेंशनर्ज ने प्रदेश के विकास में अहम योगदान दिया है और सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री के समक्ष रखी गई मांगें

हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त मोर्चा के राज्य अध्यक्ष आत्मा राम शर्मा ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और पेंशनर्ज की विभिन्न मांगें रखीं। इस अवसर पर मंडी इकाई ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए एक लाख रुपये का चेक भेंट किया।

मनरेगा नामकरण पर सवाल

मुख्यमंत्री ने मनरेगा के नाम बदले जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कानून पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी की सोच का परिणाम है, जिसमें रोजगार की गारंटी दी गई है। उन्होंने कहा कि नाम बदलने के पीछे के उद्देश्य को समझना जरूरी है।

एम्स बिलासपुर में रोबोटिक सर्जरी अब तक शुरू नहीं

सीएम सुक्खू ने बताया कि आईजीएमसी शिमला, टांडा और नेरचौक मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी शुरू हो चुकी है, जबकि एम्स बिलासपुर में यह सुविधा अब तक शुरू नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों में शिमला में 100 और टांडा में 50 रोबोटिक सर्जरी की जा चुकी हैं। सरकार प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों को दिल्ली एम्स की तर्ज पर विकसित कर रही है।