देवभूमि न्यूज 24.,इन
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने शिमला के यारोज स्थित राष्ट्रीय लेखा एवं लेखा परीक्षा अकादमी (एनएएए) में भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा (आईएएंडएएस) के 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने युवा अधिकारियों से संवैधानिक मूल्यों, ईमानदारी और पेशेवर उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया, ताकि वे लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा द्वारा स्थापित उच्च मानकों के सच्चे संरक्षक बन सकें।
राज्यपाल ने मर्यादा बनाए रखने तथा ज़मीनी स्तर पर वित्तीय जवाबदेही और रिपोर्टिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर संवाद बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने अकादमी की 1950 में स्थापना से जुड़ी समृद्ध विरासत का स्मरण करते हुए कहा कि एनएएए ने देश में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और सुशासन को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करना प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए गर्व की बात है।
राज्यपाल ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखाकार (सीएजी) के संवैधानिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह संस्था सार्वजनिक संसाधनों की रक्षा करती है और प्रशासन में वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा कि एक ऑडिटर की भूमिका केवल वित्तीय जांच तक सीमित नहीं होती; प्रत्येक लेखा प्रणालीगत सुधार का मार्ग प्रशस्त करता है और जनसेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाता है।
उन्होंने 21वीं सदी में सतत् सीखने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ज्ञान और अनुकूलन क्षमता ही पेशेवर उत्कृष्टता की कुंजी हैं। प्रशिक्षु अधिकारियों से अकादमी के संसाधनों का भरपूर उपयोग कर अपनी बौद्धिक और व्यावसायिक क्षमताओं को सशक्त बनाने का आग्रह किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भूटान और मालदीव के अधिकारी भी शामिल हैं।
इस अवसर पर राज्यपाल ने एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया। अकादमी के महानिदेशक एस. आलोक ने राज्यपाल का स्वागत किया और प्रशिक्षु अधिकारियों को शपथ दिलाई। निदेशक पुष्पलता ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) पुरुषोत्तम तिवारी, प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) सुशील कुमार ठाकुर, राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।