सराज (बंजार ) के एक और गांव में लगी आग -गुमान सिंह संयोजक हिमालय नीति अभियान

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देवभूमि न्यूज 24.इन

एक और गांव में आग लग गई, यह क्या हो रहा है बंजार के नोहंडा इलाके में ?यहां डेढ़ महीने में चार गावों में आग लग चुकी है l पहले नोएडा पंचायत के झानयार गांव में दिन के समय आग लगी l 16 घर जलकर राख हो गए l बाद में राहत कार्य चला, सरकार की तरफ से भी सात-आठ लाख रुपया प्रति घर दिए गए l दो-चार दिन बाद इस पंचायत के डिंगचा के साथ लगते शाही गांव का एक घर जला l पिछले महीने इस इलाके में बुढी दिवाली थी और उस दिन भी नाहीं गांव का एक घर जल गया l

पिछले कल 19 दिसम्बर 2025 की शाम को 6:00 बजे के करीब झनयार गावों के सामने साथ लगती पंचायत पेखड़ी के गांव पेखड़ी में आग लगी l इस घटना में तीन खहल/छानका (घास भंडारण घर) जल कर नष्ट हो गए l क्योंकि यहाँ दिन को कोई शोक आयोजन में बहुत से लोग आए हुए थे, इसलिए गांव में बहुत लोग उपलब्ध भी थे l सब ने मिल कर आग बुझाने के लिए कड़ी मेहनत की, जिस कारण 70-80 घरों वाले घने बसे गावों को बचाया जा सका l आग लगने का कारण लगता है किसी व्यक्ति की वजह से खलह में घास को आग लगी l यही खलह से घास में आग लगने का कारण झनियार तथा पिछले बर्ष तांदी में भी पाया गया l
गांव में आग लगने की घटनाएं अक्सर मंडी-कल्लू और शिमला जिला के ऊपरी इलाकों तथा खास कर मंडी-कुल्लू के सराज में इन दिनों ज्यादातर देखी जाती रही हैं l पिछले वर्ष इन्हीं दिनों बंजार का तांदी गांव पूरा जल कर नष्ट हो गया था l कुच्छ बर्ष पहले बंजार का ही कोटला व मोहनी गांव को भी जलते देखा गया है l इसी तरह बालीचौकी के डाहर तथा जंजैहली के केउली गांव को भी हमने जलते देखा l

आग लगने के कारण
इन सब गांव के जलने के पीछे के कारणों को एक बार देखना चाहिए l क्योंकि ये सभी ऊंचे बर्फ़ीले इलाके में बसे गांव हैं, जहां लोग सर्दियों में पशुओं के लिए घास इकट्ठा करते हैं और उस सुख घास को एक घर में जिसे हम खलह/छानका कहते हैं, उसमें रखते हैं l बर्फ के कारण यहाँ हिमाचल के निचले इलाकों की तरह कुनु नहीं लगाए जा सकते l अक्सर यह सुख घास और खहल ही मुख्यतय सर्दियों के दिनों में गांव में आग लगने के कारण बनते रहे हैं l इन खहल में लोग घास इसलिए रखते हैं, क्योंकि इन इलाकों में पहले बहुत बर्फ पड़ती थी l बर्फ के कारण दूर से घास लाना सर्दियों के दिनों में संभव नहीं होता था l हालांकि अब हालात बदल चुके हैं तथा अब इन इलाकों में बर्फ बहुत कम पड़ रही है l पहले हमारे इन इलाकों में पशुओं को घर की सब से निचली मंजिल में खुढ़ में रखते थे l परन्तु आज कल देखा जा रहा है की पशुओं को ज्यादातर छानके/खलह की खुड़ी में रखा जा रहा है l वहीं घास पड़ा है, जिस वजह से आग लगने के कारणों में बढ़ोतरी हो सकती है l बीड़ी-सिगरेट पिने खास कर शराबीओं द्वारा, दिवाली के पटाखे और बिजली इत्यादि इस आग के बड़े कारणों में से माने जा सकते हैं l निश्चित तौर पर मानवीय लापरवाही ही आग लगने का मुख्य कारण होता है l

इन गावों में घरों का एक दूसरे से सटे होने के कारण आग लगने पर बहुत से घर एक साथ जल जाते हैं l ठंड के कारण भी हो सकता है की पहले निजदीक नजदीक घर बनाते रहे होंगे l आजकल मालकित या भूमि की उपलब्धता भी सटे हुए घर बनाने की वजह हो रही है l

ठण्ड और लकड़ी की उपलब्धता के कारण यहां परम्परा से लकड़ी के कम से कम ढाई मंजिल या इस से बड़े घर बनते हैं l पहले तो काठकुणी घरों के निर्माण का ही रीवाज़ था l लकड़ी भी ज्यादातर देवदार, कैल इत्यादि की ही प्रयोग होती हैं l सूखे मौसम में लकड़ी में तेल होने के कारण एकदम से आग लग जाती है जिसे बुझाना मुश्किल हो जाता है l

जंगल में आग लगने तथा गावों के आसपास कचरा और उसके जलाने से भी गावों में आग लगने की घटनाएं देखी गईं हैं l

बचाव व सुरक्षा के उपाय
घास के भंडारण के लिए खलह/छानके और कुनु गावों के रिहायशी घरों से थोड़ा दूर बनाए जाने चाहिए l
खास कर इस मौसम में घरों के आसपास घास और कचरा इत्यादि न रखे l जंगलों के साथ लगते घरों को आसपास की सफाई तथा घास को हटा देना चाहिए l
गांव में घरों का निर्माण नियोजित किया जाए l एक घर से दूसरे घर की दूरी सुनिश्चित हो l गृह निर्माण में ढलान, जमीन की बनावट, भुगर्भीय स्थिति तथा पानी के बहाव इत्यादि को ध्यान में रखा जाना चाहिए l
आग बुझाने के उपायों व सुविधाओं पर काम होना चाहिए तथा घरों और गावों में आग बुझाने के सयन्त्र लगे होने चाहिए l
गावों में पानी की उपलब्धता और भंडारण का प्रावधान होना चाहिए जिस के लिए परंपरागत तलाब/ कुएँ या जल भंडारण के बड़े टेंकों का निर्माण गावों के ऊपर किया जा सकता है l
अग्निशम सुविधा की पहुंच गावों तक बनाई जानी चाहिए l
लोक शिक्षण तथा आग से बचाव की जानकारी गावों दी जानी चाहिए l
जलवायु परिवर्तन के इस दौर में भविष्य में सुरक्षात्मक कदम उठाने चाहिए, जिस स्थानीय ग्राम पंचायत और गावों सभा की भूमिका सब से प्रमुख है l सरकार/प्रशासन को गावों सभा की सहभागिता से स्थान विशेष व उक्त गावों में निर्माण के नियम कायदे निर्धारित करने चाहिए l इस में गांव की भौगोलिक तथा भूगर्भीय स्थिति को देखते हुए आग लगने, बाढ़, भूस्खलन, भूकंप इत्यादि आपदाओं के खतरों को देखते हुए निर्माण के मानक तैयार करने चाहिए l गावों सभा द्वारा निर्माण के नियम को आम सहमति से लागु करना चाहिए अन्यथा पंचायत और प्रशासन को कानूनी तौर से इन नियमों को लागू करवाना सुनिश्चित करना चाहिए l