देवभूमि न्यूज 24.इन
वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह घर में ऊर्जा और धन के प्रवाह का प्रवेश बिंदु होता है। अगर मुख्य द्वार गलत दिशा में हो, तो यह न केवल घर में नकारात्मकता लाता है, बल्कि चोरी, असुरक्षा और पैसों के फ्लो को भी बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। तो आइए जानते हैं कि कौन सी दिशा में बना दरवाजा बन सकता है परेशानी का कारण।
मुख्य द्वार की वह दिशा जो लाती है परेशानी
वास्तु के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम दिशा में बना प्रवेश द्वार सबसे अधिक समस्याएं पैदा कर सकता है। इस दिशा को राहु की दिशा माना जाता है, जो अस्थिरता, भ्रम और अप्रत्याशित समस्याओं से जुड़ा हुआ है।
क्या नकारात्मक प्रभाव होते हैं?
चोरी और असुरक्षा
दक्षिण-पश्चिम दिशा का द्वार घर में असुरक्षा की भावना पैदा करता है। वास्तु विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दिशा असामाजिक तत्वों को आकर्षित कर सकती है, जिससे चोरी या धोखाधड़ी जैसी घटनाएं होने की आशंका बढ़ जाती है।
पैसों का फ्लो रुकना
यह दिशा धन के प्रवाह का कारण बनती है। इस दिशा से आने वाली ऊर्जा पैसे को टिकने नहीं देती और व्यक्ति कितना भी कमाए, आर्थिक तंगी बनी रहती है। धन का फ्लो यानी आय का स्थिर बहाव बाधित होता है।
संबंधों में तनाव
इस दिशा में द्वार होने से घर के सदस्यों के बीच तनाव, झगड़े और गलतफहमियां बढ़ सकती हैं।
वास्तु दोष दूर करने के उपाय
द्वार पर शुभ प्रतीक
मुख्य द्वार के बाहर पंचमुखी हनुमान जी का चित्र या स्वास्तिक का चिन्ह लगाएं। हनुमान जी की उपस्थिति नकारात्मक ऊर्जा और भय को दूर करती है।
ऊर्जा का संतुलन
द्वार के दोनों ओर तांबे का पिरामिड या वास्तु यंत्र स्थापित करें। इससे राहु के नकारात्मक प्रभाव को संतुलित करने में मदद मिलती है।
प्रकाश व्यवस्था
इस क्षेत्र में हमेशा पर्याप्त और उज्ज्वल प्रकाश रखें। शाम के समय यहां दीया या बल्ब ज़रूर जलाएं।
पर्दे का उपयोग
द्वार के अंदर की तरफ भारी और गहरे रंग का पर्दा लगाएं। इससे नकारात्मक ऊर्जा घर के अंदर प्रवेश करने से पहले ही अवशोषित हो जाती है।
सामग्री
द्वार के बाहर की तरफ कठोर धातु का उपयोग करने से बचें, यदि संभव हो तो लकड़ी के फ्रेम को प्राथमिकता दें।