चंडीगढ़ पीजीआई की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा,महिलाओं में ब्रेस्ट तो पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ा

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देवभूमि न्यूज नेटवर्क
चंडीगढ़।

कैंसर अब केवल बढ़ती उम्र की बीमारी नहीं रह गई है, बल्कि बदलती जीवनशैली के कारण यह युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। पीजीआई चंडीगढ़ की ओर से जारी नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (NCD) रिपोर्ट में महिलाओं और पुरुषों दोनों में कैंसर के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार जुलाई 2018 से दिसंबर 2021 के बीच दर्ज नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज मामलों में सबसे बड़ा हिस्सा कैंसर का रहा। कुल मामलों में से करीब 62.9 प्रतिशत कैंसर से संबंधित पाए गए। इस दौरान महिलाओं में जहां ब्रेस्ट, गला और यूट्रस कैंसर के मामले बढ़े, वहीं पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर तेजी से उभरा है।
महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर 36.3 प्रतिशत तक पहुंचा
पीजीआई के कम्युनिटी मेडिसिन और स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ से जुड़े विशेषज्ञ प्रो. जे.एस. ठाकुर के अनुसार, वर्ष 2018 से 2021 के बीच पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के मामलों में 48.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की दर बढ़कर 36.3 प्रतिशत तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रोस्टेट कैंसर अब पुरुषों के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है।
पुरुषों में मौत की दर 35 से 40 प्रतिशत तक
हेल्थ सर्वे 2022–24 के आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रो. ठाकुर ने बताया कि 45 से 60 वर्ष के पुरुषों में कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इस आयु वर्ग में कैंसर के मामलों में 57.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं 45 से 69 वर्ष की महिलाओं में कैंसर की दर 58.5 प्रतिशत पाई गई।
डॉक्टरों के मुताबिक, यदि प्रोस्टेट कैंसर का पता चौथी स्टेज में चलता है, तो पुरुषों में मृत्यु दर 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। वहीं महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का पता अक्सर 40 से 42 वर्ष की उम्र में चलता है।
ये हैं कैंसर के प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार पुरुषों और महिलाओं में कैंसर के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। इनमें बदलती जीवनशैली, देर से शादी, देर से संतान होना, पुरुषों में अत्यधिक शराब सेवन और धूम्रपान प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा लंबे समय तक रेडिएशन के संपर्क में रहना, मोबाइल और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ सोना, जेनेटिक कारण, फास्ट फूड का अधिक सेवन और काले प्लास्टिक में गर्म भोजन का उपयोग भी कैंसर के खतरे को बढ़ाता है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
शरीर में गांठ बनना, अचानक वजन कम या बढ़ना, घाव का देर से भरना, तिल के आकार या रंग में बदलाव, लगातार थकान, खांसी, सांस लेने में दिक्कत, अपच और बिना कारण जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द कैंसर के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं।
कैंसर से बचाव के लिए ये उपाय जरूरी
विशेषज्ञों ने लोगों को शराब और धूम्रपान से दूरी बनाने, फल और हरी सब्जियों से भरपूर आहार लेने, नियमित व्यायाम करने की सलाह दी है। साथ ही HIV और हेपेटाइटिस-बी जैसी बीमारियों से बचाव के लिए वैक्सीन लगवाने पर भी जोर दिया गया है।
डॉक्टरों का मानना है कि समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से काफी हद तक बचा जा सकता है।