गरीबों के हक की आवाज़ बनी जनहित याचिका, हाईकोर्ट में दायर पत्रकारों से सहयोग की अपील

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देवभूमि न्यूज नेटवर्क
हिमाचल प्रदेश
शिमला

हिमाचल प्रदेश में गरीब, वंचित और शोषित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए माननीय उच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश में जनहित याचिका संख्या 70516/2025 दायर की गई है। यह जनहित याचिका 27 दिसंबर 2025 को प्रदेश के सिरमौर सहित समूचे हिमाचल में रहने वाले गरीब, भूमिहीन, अनुसूचित जाति/जनजाति एवं अन्य वंचित समुदायों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा और बहाली के उद्देश्य से दाखिल की गई।
यह याचिका गाँवों की सामुदायिक शामलात भूमि को अवैध कब्जों, निजीकरण और अनुचित बंटवारे से मुक्त कराकर पुनः ग्राम समाज को सौंपने की मांग करती है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि रोटी, रोज़गार, सम्मान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है। जो भूमि कभी चरागाह, जलस्रोत और गरीबों का सहारा थी, उसे फिर से वंचितों के हाथों में लौटाना इस याचिका का मूल उद्देश्य है।
याचिका के माध्यम से प्रदेश में रहने वाले लाखों गरीब और श्रमिक वर्ग चाहे वे किसी भी समुदाय से संबंध रखते हों को उनका न्यायोचित अधिकार दिलाने का प्रयास किया गया है। इस जनहित आंदोलन को सामाजिक सरोकारों से जुड़े बुद्धिजीवियों का सहयोग प्राप्त हो रहा है, वहीं डॉ. नीरज कुमार के मार्गदर्शन को इस संघर्ष की बड़ी शक्ति बताया गया है।
इस अवसर पर एडवोकेट अनिल कुमार मंगेट, उच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश ने प्रदेश के सभी पत्रकारों एवं मीडिया बंधुओं से अपील करते हुए कहा कि यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सिरमौर और पूरे हिमाचल की सामूहिक आवाज़ है। उन्होंने मीडिया से इस जनहित याचिका को जन-जन तक पहुँचाने में सहयोग और सहभागिता की अपील की।
उन्होंने कहा, “डरिए मत, आगे आइए। आज यदि हम सब साथ देंगे, तो कल न केवल ज़मीन बचेगी, बल्कि गरीबों का सम्मान और अधिकार भी सुरक्षित रहेगा।”
यह जनहित याचिका प्रदेश में सामाजिक न्याय की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, जिस पर अब सभी की निगाहें माननीय उच्च न्यायालय के आगामी निर्णय पर टिकी हैं