*देवभूमि न्यूज 24.इन*
हिमाचल प्रदेश में आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों का संघर्ष अब चरम पर पहुंच गया है। बीते दो दिनों से जहां प्रदेशभर में आपातकालीन एंबुलेंस सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं, वहीं शनिवार को 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों ने पूरे प्रदेश में जोरदार प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दूसरे दिन मंडी जिला में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सीटू के बैनर तले एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन ने मंडी शहर में प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली। इसी दौरान एक एंबुलेंस कर्मचारी ने अपने ऊपर डीजल छिड़ककर आत्मदाह का प्रयास किया। हालांकि मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए उसे धक्का देकर गंभीर रूप से झुलसने से बचा लिया। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया।
बताया जा रहा है कि सरकार और प्रबंधन के रवैये से आहत होकर कर्मचारी बेहद मानसिक दबाव में हैं, जिसके चलते आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। यह प्रदर्शन केवल मंडी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रदेश में लगातार दो दिनों से जारी है।
गौरतलब है कि 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों ने पहले ही 26 और 27 दिसंबर को दो दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया था। इसके चलते प्रदेश में एक भी 108 या 102 एंबुलेंस सड़कों पर नजर नहीं आई, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने 108-102 एंबुलेंस प्रबंधन और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यूनियन के जिला प्रधान सुमित कपूर और महासचिव पंकज कुमार ने बताया कि प्रदेशभर में करीब 1300 कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। उनका आरोप है कि प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों का लगातार शोषण किया जा रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि उनसे नियमानुसार 8 घंटे की बजाय 12 घंटे की ड्यूटी करवाई जा रही है, जबकि अन्य विभागों में कार्य अवधि 8 घंटे निर्धारित है। इसके अलावा जो वेतन उन्हें दिया जा रहा है, उससे परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है।
यूनियन पदाधिकारियों ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है तथा 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।
कर्मचारियों ने दो टूक कहा कि यह स्थिति कंपनी और व्यवस्था के शोषण की पराकाष्ठा है और यदि समाधान नहीं निकाला गया तो उन्हें लंबा संघर्ष करने के लिए विवश होना पड़ेगा।