*देवभूमि न्यूज 24.इन*
हिमाचल प्रदेश को वर्ष 2027 तक आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प को साकार करने की दिशा में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने एक ऐतिहासिक ‘ग्रीन टू गोल्ड’ पहल की शुरुआत की है। इस दूरदर्शी योजना के तहत राज्य सरकार ने औद्योगिक भांग की खेती को वैध एवं विनियमित करने का निर्णय लिया है, जिससे हिमाचल प्रदेश को वैश्विक बायो-इकोनॉमी के अग्रणी राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
दशकों से कुल्लू, मंडी और चंबा जैसी घाटियों में जंगली रूप से उगने वाली भांग को अब तक नशे और अवैध व्यापार से जोड़कर देखा जाता रहा है, लेकिन वर्तमान प्रदेश सरकार ने इसके औषधीय और औद्योगिक गुणों को पहचानते हुए इसे एक बहुमूल्य आर्थिक संसाधन के रूप में स्थापित करने की पहल की है।
औद्योगिक भांग का उपयोग पर्यावरण अनुकूल कपड़ा उद्योग, पेपर व पैकेजिंग, कॉस्मेटिक, बायो-फ्यूल, ऊर्जा उद्योग के साथ-साथ बायो-प्लास्टिक जैसे अत्याधुनिक उत्पादों के निर्माण में किया जा सकेगा। इससे हिमाचल प्रदेश पर्यावरण हितैषी औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।
इस नीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि औद्योगिक उपयोग के लिए उगाई जाने वाली भांग में टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल (THC) की मात्रा 0.3 प्रतिशत से कम रखी जाएगी। वैज्ञानिक मानकों के तहत नशा रहित पौधों की खेती सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार के दुरुपयोग की संभावना न रहे, जबकि उच्च गुणवत्ता वाले फाइबर और बीज उत्पादन की क्षमता बनी रहे।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि 24 जनवरी 2025 को आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में भांग की नियंत्रित खेती के पायलट अध्ययन प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई थी। इस रणनीति का उद्देश्य भांग की नशीली छवि को बदलकर इसे एक वैध औद्योगिक संसाधन के रूप में स्थापित करना है।
सरकारी अनुमानों के अनुसार, इस योजना के पूर्ण रूप से लागू होने पर राज्य को प्रति वर्ष 500 से 2000 करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। राज्य सरकार एक मजबूत कानूनी और वैज्ञानिक ढांचा तैयार कर उस बाजार पर अधिकार करना चाहती है, जिस पर वर्तमान में अवैध व्यापार या अंतरराष्ट्रीय आयातों का कब्जा है।
यह पहल किसान समुदाय के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगी। भांग एक जलवायु-अनुकूल फसल है, जिसे कपास जैसी पारंपरिक फसलों की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत कम पानी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा इस फसल को जंगली जानवरों से नुकसान की आशंका भी नहीं रहती, जिससे किसानों को अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी।
इस योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर और डॉ. यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी को उच्च उपज और कम THC वाले बीज विकसित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस विषय पर राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने उत्तराखंड के डोईवाला तथा मध्य प्रदेश में हो रही औद्योगिक भांग की खेती का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है।
मुख्यमंत्री का दीर्घकालिक लक्ष्य हिमाचल प्रदेश को पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री, विशेष वस्त्र और आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना है। इससे न केवल वर्ष 2032 तक हिमाचल को देश के सबसे समृद्ध राज्यों में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त होगा, बल्कि युवाओं के लिए नए स्टार्टअप और रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार नशे को नहीं, बल्कि उद्योग और रोजगार को बढ़ावा दे रही है।