देवभूमि न्यूज 24.इन
हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 की शुरुआत धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ संयोग के साथ हो रही है। साल की पहली पूर्णिमा पौष पूर्णिमा के रूप में मनाई जाएगी, जो तिथियों की गणना में अंतर के कारण दो दिन 2 और 3 जनवरी 2026 को पड़ेगी।
पंचांग के अनुसार पौष पूर्णिमा तिथि 2 जनवरी 2026 को सायं 6:53 बजे प्रारंभ होकर 3 जनवरी 2026 को दोपहर 3:32 बजे तक रहेगी। इसी कारण देशभर में श्रद्धालु दोनों दिनों में पुण्य स्नान, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान करेंगे।
संगम स्नान का विशेष महत्व
पौष पूर्णिमा के दिन प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम (गंगा-यमुना-सरस्वती) में स्नान की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन संगम में स्नान करने से पापों का नाश, मन की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मान्यता है कि पौष पूर्णिमा पर किया गया स्नान एवं दान हजारों अश्वमेध यज्ञों के समान फल प्रदान करता है।
माघ मेला और कल्पवास का आरंभ
पौष पूर्णिमा के साथ ही प्रयागराज में माघ मेला का औपचारिक शुभारंभ होता है। इसी दिन से कल्पवास भी प्रारंभ होता है, जो माघ मास की पूर्णिमा तक चलता है।
कल्पवास में श्रद्धालु संगम तट पर एक माह तक संयमित जीवन व्यतीत करते हैं
ब्रह्मचर्य पालन
सात्त्विक भोजन
नियमित स्नान
जप, तप और दान
संतों और साधुओं का सान्निध्य
यह जीवनशैली आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम मानी जाती है।
दान-पुण्य का विशेष योग
पौष पूर्णिमा के दिन अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़, कंबल, घी और स्वर्ण का दान विशेष फलदायी माना गया है। गरीबों, साधुओं और ब्राह्मणों को दान देने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ की संभावना
हर वर्ष की भांति इस बार भी पौष पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालुओं के प्रयागराज पहुंचने की संभावना है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा, स्वच्छता, यातायात और स्नान व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए जाते हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
धार्मिक दृष्टि से वर्ष की शुभ शुरुआत
पौष पूर्णिमा के साथ वर्ष 2026 की शुरुआत होना धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से शुभ संकेत माना जा रहा है। यह पर्व आस्था, संयम, सेवा और साधना का संदेश देता है।