राजस्व मामलों के त्वरित निपटारे को लेकर मुख्यमंत्री सुक्खू के सख्त निर्देश

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तहसीलदार सप्ताह में तीन दिन सुनेंगे तकसीम मामले, 31 मार्च तक दुरुस्ती प्रकरण निपटाने का लक्ष्य

 *देवभूमि न्यूज नेटवर्क*
     *ब्यूरो,शिमला*

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए राजस्व मामलों के समयबद्ध और प्रभावी निपटारे के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार रामसुभग सिंह, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि सभी जिलों के उपायुक्त वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।


मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 5 जनवरी 2026 के उपरांत सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार प्रत्येक सप्ताह मंगलवार, बुधवार और वीरवार को तकसीम (भूमि विभाजन) मामलों की सुनवाई करेंगे। इसके तहत हर माह न्यूनतम 12 दिन तकसीम मामलों की सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी।


उन्होंने कहा कि जिला उपायुक्त प्रत्येक शनिवार को तकसीम मामलों की समीक्षा करेंगे और उसी दिन अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) को प्रगति रिपोर्ट भेजेंगे। राजस्व सचिव सोमवार को यह रिपोर्ट राजस्व मंत्री को प्रस्तुत करेंगे, जबकि हर माह के अंतिम सोमवार को राजस्व मंत्री मुख्यमंत्री को प्रगति से अवगत करवाएंगे।


मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग को प्रदेश में निजी भूमि, वन भूमि और सरकारी भूमि का पूर्ण विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही राजस्व अदालतों में लंबित मामलों का प्रकार, अवधि और स्थिति सहित विस्तृत विवरण उपलब्ध करवाने को कहा गया।


ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि राजस्व मामलों का त्वरित समाधान सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने दुरुस्ती से संबंधित सभी लंबित मामलों को 31 मार्च 2026 तक निपटाने के निर्देश दिए। लंबित मामलों के शीघ्र समाधान के लिए सेवानिवृत्त पटवारी, कानूनगो, नायब तहसीलदार और तहसीलदारों की पुनर्नियुक्ति करने के भी निर्देश दिए गए।


मुख्यमंत्री ने राजस्व मामलों के समाधान को और प्रभावी बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को समुचित प्रशिक्षण प्रदान करने पर भी बल दिया।


बैठक में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने राजस्व मामलों के समयबद्ध निपटारे के लिए कई बहुमूल्य सुझाव दिए। इस अवसर पर बताया गया कि राजस्व लोक अदालतों के तहत अक्तूबर 2023 से अब तक प्रदेश में


इंतकाल के 4,24,368,
तकसीम के 25,918,
निशानदेही के 47,075, तथा
दुरुस्ती के 12,896 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया जा चुका है।