*देवभूमि न्यूज 24.इन*
⭕हर वर्ष की तरह जब दुनिया १ जनवरी को नए वर्ष का स्वागत करती है, उसी बीच हिंदू पंचांग की परंपरा के अनुसार एक अलग, गहन और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध नया साल आता है जिसे हिंदू नववर्ष कहा जाता है।
यह वही समय है जब चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रथम प्रतिपदा तिथि के साथ नया संवत्सर आरंभ होता है। जो २०२६ में एक विशेष दिन १९ मार्च को पड़ रहा है। हिंदू नववर्ष की तिथि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा है, जो हमारे सांस्कृतिक परंपरा की एक शुरुआत मानी जाती है।
⚜️हिंदू नववर्ष २०२६ की तिथि
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साल २०२६ में हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत २०८३) १९ मार्च २०२६ (गुरुवार) से शुरू हो रहा है। यह तिथि चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा है, जो हिंदू पंचांग के अनुसार नया वर्ष आरंभ करने की तिथि मानी जाती है। इस दिन से विक्रम संवत २०८३ की आधिकारिक शुरूआत होगी। इसके अलावा यह दिन ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि निर्माण का शुरुआती समय भी माना जाता है।
⚜️हिंदू नव वर्ष २०२६ का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
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हिंदू नववर्ष सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है। यह तिथि चैत्र नवरात्र के शुरू होने के समय आती है, जब नवरात्रि के नौ दिन तक माँ दुर्गा के नव स्वरूपों की पूजा विधिवत की जाती है। ये नौ दिन शक्ति, समृद्धि और समर्पण के नए आरंभ के संकेत के रूप हैं। इस दिन घरों में दीपक जलाए जाते हैं, भगवान गणेश और देवी-देवताओं की पूजा होती है। पुराने कर्मों को पीछे छोड़कर नया, सकारात्मक और नैतिक जीवन आरंभ करने का संकल्प लिया जाता है।
⚜️विक्रम संवत २०८३ में क्या विशेष है?
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हर संवत्सर का अपना नाम, ग्रह पुरोहित और शुभ ग्रह होते हैं। इसी क्रम में वर्ष २०८३ को कई ज्योतिषियों के अनुसार रौद्र भी कहा जा रहा है, जिसमें बृहस्पति (गुरु) को राजा ग्रह और मंगल को मंत्री ग्रह के रूप में माना जाता है। साल २०८३ में अधिकमास भी पड़ेगा। जिसका अर्थ है एक अतिरिक्त माह जो इस संवत के अनुभव और भी गहन धार्मिक साधना, दान-धर्म और आत्मचिंतन के लिए उपयुक्त बनाएगा।
*🚩हरिऊँ🚩*