मकर संक्रांति २०२६: क्यों खास है मकर संक्रांति पर स्नान और दान? जानें इसके पीछे छिपा धार्मिक रहस्य

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 *देवभूमि न्यूज 24.इन*

🌞मकर संक्रांति भारत का एक प्रसिद्ध पर्व है. यह हर साल माघ माह में मनाया जाता है. यह त्योहार विशेष रूप से सूर्यदेव के मकर राशि में गोचर करने के अवसर पर मनाया जाता है.

इस दिन भारत के अलग-अलग हिस्सों में तिल-गुड़ से बनी मिठाइयां, चूड़ा और दही खाया जाता है और पतंग उड़ाई जाती है. मकर संक्रांति के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है. लोग इस दिन सुबह जल्दी उठकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करते हैं और दान-पुण्य करते हैं. आइए जानते हैं इसके पीछे छिपे धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से.

☀️मकर संक्रांति पर स्नान का महत्व
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है. इस दिन गंगा, यमुना, गोदावरी समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है. स्नान के बाद सूर्यदेव की पूजा करनी चाहिए. कहा जाता है कि ऐसा करने से स्वास्थ्य, यश और समृद्धि की प्राप्ति होती है.

☀️मकर संक्रांति पर दान का महत्व
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मकर संक्रांति के दिन दान देना अत्यंत शुभ माना गया है. मान्यता है कि इससे पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं. इस दिन तिल, गुड़, चावल, खिचड़ी, कंबल, वस्त्र और अन्न का दान करना शुभ माना जाता है.

ऐसा विश्वास है कि मकर संक्रांति के दिन किया गया दान अक्षय फल देता है, यानी यह पुण्य कभी नष्ट नहीं होता. कहा जाता है कि इस दिन किसी भी वस्तु का दान करें या न करें, लेकिन तिल और गुड़ का दान अवश्य करना चाहिए. तिल को पाप-नाशक माना जाता है, वहीं गुड़ को मधुरता का प्रतीक माना गया है. इसलिए इन दोनों का दान विशेष फलदायी होता है

-डॉ दीपक दुबे.

      *🚩ऊँ_सूर्याय_नम:🚩*