*देवभूमि न्यूज 24.इन*
*राज्य ब्यूरो,शिमला*
आज का दिन हिमाचल प्रदेश के लिए केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि संवेदनाओं, भरोसे और भविष्य की उम्मीदों से भरा हुआ क्षण था। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश सचिवालय से मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के अंतर्गत राज्य के चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशंस सराहन, टूटीकंडी और मशोबरा में रह रहे ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को एक विशेष शैक्षणिक एवं अनुभवात्मक यात्रा पर भावुक माहौल में रवाना किया।
मुख्यमंत्री ने बच्चों से आत्मीय संवाद करते हुए उन्हें प्यार, भरोसे और शुभकामनाओं के साथ विदा किया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल शहरों और इमारतों को देखने की नहीं, बल्कि अपने भीतर छुपे आत्मविश्वास, जिज्ञासा और सपनों को पहचानने की यात्रा है। मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा कि वे हर अनुभव को खुले मन से अपनाएं और इसे अपने भविष्य की मजबूत नींव बनाएं।

इस शैक्षणिक भ्रमण में प्रदेश के तीन बाल देखभाल संस्थानों में रह रहे कुल 52 बच्चे भाग ले रहे हैं। यह यात्रा 15 जनवरी 2026 तक चलेगी, जिसके दौरान बच्चे देश के प्रमुख शहरों, ऐतिहासिक धरोहरों, सांस्कृतिक स्थलों और शैक्षणिक संस्थानों से रूबरू होंगे।
अनुभवों से संवरता बचपन
यात्रा के दौरान बच्चे चंडीगढ़, दिल्ली, आगरा और गोवा जैसे शहरों का भ्रमण करेंगे। वे वोल्वो बस, वंदे भारत एक्सप्रेस, मेट्रो रेल, हवाई यात्रा, क्रूज और हॉप-ऑन हॉप-ऑफ पर्यटन बस जैसी आधुनिक परिवहन सुविधाओं का अनुभव करेंगे, जो उनके जीवन में पहली बार होने वाले अनुभवों में से एक होंगे।
दिल्ली में बच्चे लाल किला, कुतुब मीनार, इंडिया गेट, राजघाट, शक्ति स्थल, वीर भूमि, हुमायूं का मकबरा, राष्ट्रीय प्राणी उद्यान, राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय जैसे स्थलों को देखेंगे, जहां इतिहास, विज्ञान और राष्ट्र निर्माण की कहानियां उन्हें प्रेरित करेंगी। आगरा में ताजमहल की भव्यता उनके मन में सौंदर्य और धरोहर के प्रति सम्मान जगाएगी।
गोवा में समुद्र की लहरें, चर्चों की शांति, मंदिरों की आस्था, विज्ञान संस्थान और क्रूज यात्रा बच्चों के जीवन में नई ऊर्जा, आत्मविश्वास और व्यापक दृष्टिकोण भरेंगी।
सरकार नहीं, अभिभावक की भूमिका
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत राज्य सरकार केवल इन बच्चों की संरक्षक नहीं, बल्कि अभिभावक की भूमिका निभा रही है। इन बच्चों को केवल आश्रय नहीं, बल्कि सम्मान, अवसर और सपनों को साकार करने की राह दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के शैक्षणिक और अनुभवात्मक भ्रमण बच्चों में आत्मविश्वास, देश के प्रति समझ और सामाजिक चेतना विकसित करते हैं। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि बच्चों की सुरक्षा, सुविधा और देखभाल में कोई भी कमी न रहे।
एक संकल्प, जो मिसाल बन गया
मुख्यमंत्री ने स्मरण कराया कि शपथ ग्रहण के तुरंत बाद उन्होंने टूटीकंडी स्थित बालिका आश्रम जाकर निराश्रित बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की संपूर्ण जिम्मेदारी उठाने का संकल्प लिया था। इस संकल्प को कानून का रूप देकर हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बना।
28 फरवरी 2023 से अब तक लगभग 4000 अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाया जा चुका है। इन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, जेब खर्च, करियर काउंसलिंग, देश-विदेश भ्रमण और स्टार्ट-अप के लिए 2 लाख रुपये तक की सहायता दी जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों की आंखों में उत्साह, चेहरे पर मुस्कान और दिलों में सपनों की चमक साफ दिखाई दे रही थी। यह यात्रा न केवल उनके कदमों को आगे बढ़ाएगी, बल्कि उनके भविष्य को नई दिशा भी देगी।
इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक मोहन लाल ब्राक्टा, महापौर शिमला नगर निगम सुरेंद्र चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्याम भगत नेगी, उपायुक्त अनुपम कश्यप, निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग डॉ. पंकज ललित, पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे।