हिम-चंडीगढ़’ पर संग्राम,विधायक की अपनी पंचायत से उठा विरोध, सुक्खू सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट संकट में

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देवभूमि न्यूज 24.इन
हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार का एक और ‘चंडीगढ़’ बसाने का सपना अब ज़मीन पर उतरने से पहले ही विरोध के भंवर में फंसता दिख रहा है। बद्दी के नज़दीक शीतलपुर क्षेत्र में प्रस्तावित ‘हिम-चंडीगढ़’ परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस आंदोलन की चिंगारी स्थानीय विधायक रामकुमार चौधरी की अपनी ही गृह पंचायत हरिपुर-संडोली से भड़की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रदेश सरकार ने शीतलपुर क्षेत्र में लगभग 3400 बीघा भूमि के अधिग्रहण और उसे हिमुडा को सौंपने का फैसला कैबिनेट में पारित कर लिया, लेकिन ज़मीन के असली मालिकों—किसानों और पंचायतों—को विश्वास में तक नहीं लिया गया। लोगों का कहना है कि यह फैसला एकतरफा और जबरन थोपा जा रहा है।
इसी के विरोध में संडोली और मलपुर पंचायतों के लोगों ने शीतलपुर सामुदायिक केंद्र में बैठक कर सरकार और स्थानीय विधायक के खिलाफ नारेबाजी की। ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी ज़मीन सरकार को नहीं देंगे।
ग्रामीणों का तर्क है कि बद्दी क्षेत्र पहले ही औद्योगिक प्रदूषण से बुरी तरह प्रभावित है और शीतलपुर इलाका इस क्षेत्र की आख़िरी ग्रीन बेल्ट है। यहां के अधिकांश लोग खेती और डेयरी पर निर्भर हैं। ऐसे में नया शहर बसाने से उनका आजीविका आधार खत्म हो जाएगा।
विरोध को संगठित रूप देने के लिए किसानों और स्थानीय लोगों ने संघर्ष समिति का गठन कर लिया है। समिति में भाग सिंह कुंडलस को अध्यक्ष, चरण दास व दीवान चंद को उपाध्यक्ष और चिंतन कुमार चौधरी को महासचिव चुना गया है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो बड़ा जनआंदोलन छेड़ा जाएगा और हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ याचिका दायर की जाएगी।
संघर्ष समिति के नेताओं का आरोप है कि सरकार की मंशा किसानों की उपजाऊ ज़मीन बिल्डरों के हवाले कर मुनाफा कमाने की है। उनका कहना है कि यह लड़ाई ज़मीन, रोज़गार और पर्यावरण बचाने की है, और इसे किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा।
अगर ग्रामीणों का यह तीखा विरोध आगे और तेज़ होता है, तो ‘हिम-चंडीगढ़’ परियोजना सुक्खू सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बन सकती है। विधायक की अपनी पंचायत से शुरू हुआ यह आंदोलन आने वाले दिनों में कितना व्यापक रूप लेता है, इस पर पूरे प्रदेश की नज़र टिकी हुई है।