देवभूमि न्यूज 24.इन
राज्य ब्यूरो, शिमला
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिमला नगर निगम के मेयर का कार्यकाल ढाई वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किए जाने के मामले में राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। समय पर संतोषजनक जवाब दाखिल न करने पर हाईकोर्ट ने सुक्खू सरकार पर ₹50 हजार का सशर्त जुर्माना लगाया है और शहरी विकास विभाग को नोटिस जारी किया है।
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधवालिया एवं न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि सरकार द्वारा दाखिल जवाब अब भी त्रुटिपूर्ण है और इसे संशोधित कर दोबारा रिकॉर्ड पर नहीं लाया गया। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए सरकार को मात्र दो दिन का समय दिया है कि वह सभी आपत्तियां दूर कर संशोधित जवाब दाखिल करे, ताकि याचिका पर सुनवाई पूरी की जा सके। कोर्ट ने चेतावनी दी कि तय समय में जवाब न आने पर जुर्माना पक्का माना जाएगा।
यह विवाद उस अध्यादेश से जुड़ा है, जिसके माध्यम से शिमला नगर निगम के मेयर और डिप्टी मेयर का कार्यकाल ढाई वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किया गया। याचिका में दावा किया गया है कि यह अध्यादेश नगर निगम अधिनियम की धारा 36 और रोस्टर व्यवस्था के विरुद्ध है। सरकार ने इस अध्यादेश को राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा था, लेकिन अब तक इस पर स्वीकृति नहीं मिल पाई है। साथ ही अध्यादेश की वैधता अवधि भी शीघ्र समाप्त होने वाली है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुधीर ठाकुर ने अदालत को बताया कि अंतरिम अवधि में कोर्ट ने सरकार से स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी 2026 को होगी।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में राज्य मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद मेयर व डिप्टी मेयर का कार्यकाल बढ़ाने के लिए पहले अध्यादेश लाया गया और बाद में दिसंबर माह में विधानसभा द्वारा विधेयक पारित कर इसे कानून का रूप दिया गया। हालांकि, राज्यपाल की स्वीकृति लंबित रहने के कारण यह निर्णय अब कानूनी विवादों में घिर गया है।