क्या होता है पाला गिरना, जिससे खड़ी फसल हो जाती है बर्बाद

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देवभूमि न्यूज 24.इन
भारत में सर्दियों का मौसम अपने चरम पर है। दिसंबर और जनवरी के महीनों में कई इलाकों से फसलों पर पाला गिरने के कारण भारी नुकसान की खबरें सामने आती हैं। लेकिन आज भी अधिकांश लोगों को यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि पाला क्या होता है और यह फसलों को किस तरह नुकसान पहुंचाता है।
क्या होता है पाला पड़ना
जब तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस या उससे नीचे चला जाता है, तो वातावरण में मौजूद जलवाष्प जमकर ठोस रूप ले लेती है। पौधों की पत्तियों, तनों और फूलों पर जमने वाली बर्फ की यही पतली सफेद परत पाला कहलाती है।
पाला पड़ने से पौधों की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे फसल की बढ़वार रुक जाती है। अधिक पाला पड़ने पर फूल और फल झुलस जाते हैं, जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है।
इन फसलों पर पड़ता है सबसे अधिक असर
लंबे समय तक पाला पड़ने से लगभग सभी फसलें प्रभावित होती हैं, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर कोमल और फलदार फसलों पर होता है।
प्रमुख रूप से प्रभावित फसलें हैं
मसूर,चना,सरसों,टमाटर,मिर्च,धनिया
पालक,फूलगोभी
यदि पाला कई दिनों तक लगातार पड़ता रहे तो गेहूं, अरहर और अलसी जैसी फसलें भी इससे सुरक्षित नहीं रहतीं। अधिक ठंड से फसलों में झुलसा रोग भी लग सकता है, जिससे पत्तियां और फल सिकुड़कर बदरंग हो जाते हैं।
पाला पड़ने पर किसान ये गलतियां न करें
पाले के दिनों में खेत की जुताई बिल्कुल न करें, इससे मिट्टी का तापमान और गिर जाता है।
यदि बारिश की संभावना हो तो सिंचाई से बचें, क्योंकि अधिक नमी से खासकर सब्जी फसलों में रोग लगने का खतरा बढ़ जाता है।
कीटनाशक का छिड़काव कब करें
पाले से बचाव के लिए यदि कीटनाशक, रोगनाशक या खरपतवारनाशक का छिड़काव करना हो, तो इसे खुली धूप और दोपहर के समय करें। यही समय रासायनिक छिड़काव के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है।
लेकिन यदि कोहरा छाया हो,बादल हों
बारिश की संभावना हो तो किसी भी प्रकार का छिड़काव न करें, विशेषकर जब फसल में फूल आ चुके हों। गलत समय पर दवा के छिड़काव से फूल झड़ सकते हैं और दाने या फल नहीं बनते।
प्राकृतिक उपाय अपनाएं
पाले से बचाव के लिए किसान प्राकृतिक व देशी उपाय अपना सकते हैं, जैसे—
खेत में धुआं करना
हल्की नमी बनाए रखना
नीम तेल का प्रयोग
कंडों की राख का बुरकाव
यदि खेत में मधुमक्खियां पाली गई हों या आसपास आती हों, तो दिन के समय रासायनिक छिड़काव न करें, क्योंकि इससे मधुमक्खियों के मरने का खतरा रहता है। छिड़काव हमेशा शाम के समय करें, जब मधुमक्खियां अपने छत्तों में लौट जाती हैं।