देवभूमि न्यूज 24.इन
राज्य ब्यूरो,शिमला
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा सरकारी धन के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए शुरू की गई तकनीक-आधारित मुहिम में एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। राज्य सरकार के वेलफेयर विभाग में डिजिटाइजेशन और वेरिफिकेशन के दौरान यह पाया गया कि 38,672 ऐसे बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही थी, जिनका निधन पहले ही हो चुका है।
हिमाचल प्रदेश सरकार वर्तमान में आठ लाख से अधिक लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर आईटी विभाग को इस पूरी व्यवस्था की डिजिटल जांच का जिम्मा सौंपा गया था। आईटी विभाग ने इसके लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर तैयार कर पेंशन लाभार्थियों का सर्वे किया। इस सर्वे के दौरान यह भी सामने आया कि 5,538 लाभार्थी ऐसे थे, जो सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिए पात्र ही नहीं थे।
इन सभी आंकड़ों को मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद मुख्यमंत्री सुक्खू ने वेलफेयर विभाग को निर्देश दिए कि उपलब्ध डाटा के आधार पर पेंशन वितरण प्रणाली में तत्काल सुधार किया जाए और अपात्र तथा मृत लाभार्थियों के नाम हटाए जाएं।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, आईटी के प्रभावी उपयोग के बिना इस तरह की बड़ी लापरवाही और अनियमितता को पकड़ पाना संभव नहीं था। उल्लेखनीय है कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन से जुड़े पूरे डाटा का प्रबंधन नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) द्वारा किया जाता है।
राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल सरकारी धन की बचत होगी, बल्कि वास्तविक पात्र लाभार्थियों को समय पर और पारदर्शी तरीके से पेंशन सुनिश्चित की जा सकेगी।