जयराम ठाकुर ने फैसले को बताया ऐतिहासिक, सुक्खू सरकार पर बोला तीखा हमला
*देवभूमि न्यूज 24.इन*
*राज्य ब्यूरो,शिमला*
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा 30 अप्रैल 2026 से पहले पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनाव करवाने के आदेश के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कांग्रेस सरकार पर जोरदार हमला बोला है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि हाईकोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए बड़ा झटका है, जो सत्ता के नशे में संवैधानिक नियमों को कुचलने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले पांच महीनों से मुख्यमंत्री आपदा प्रबंधन अधिनियम का बहाना बनाकर पंचायत और निकाय चुनावों को टाल रहे थे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा,
“यह अत्यंत दुखद है कि जिस कानून को लोगों की जान-माल की रक्षा के लिए बनाया गया था, उसी कानून का इस्तेमाल सुक्खू सरकार अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए कर रही है।”
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की लोकतंत्र को दबाने की पुरानी आदत रही है। उन्होंने कहा कि सरकार चुनाव से डर रही है और जनता का सामना करने से बच रही है। भाजपा इस फैसले का स्वागत करती है और सरकार को चेतावनी देती है कि अब कोई बहाना नहीं चलेगा। चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाए और शीघ्र चुनाव कराए जाएं।
सीएम सुक्खू ने फैसले पर उठाए सवाल
वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला में पत्रकारों से बातचीत करते हुए हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू है, तो यह फैसला किस कानून के आधार पर दिया गया है। इससे तो ऐसा प्रतीत होता है कि आपदा कानून के कोई मायने ही नहीं रह गए।
सीएम सुक्खू ने फैसले को मनमाना बताते हुए कहा कि कुछ मामलों में कानून की सही व्याख्या नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार इस फैसले का गहराई से अध्ययन करेगी और आवश्यक कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम संसद द्वारा बनाया गया कानून है और इसके महत्व को लेकर कोर्ट से सवाल किया जाएगा।
हाईकोर्ट के सख्त निर्देश
उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों में देरी पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि 30 अप्रैल 2026 से पहले चुनाव हर हाल में पूरे किए जाएं। कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को बचाने के लिए चुनावों को अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकता।
न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने आदेश दिया है कि 20 फरवरी 2026 से चुनाव प्रक्रिया शुरू की जाए और 30 अप्रैल तक मतदान पूरा किया जाए। साथ ही पंचायती राज विभाग, राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार को 28 फरवरी तक संयुक्त बैठक कर चुनावी रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस फैसले के बाद प्रदेश में पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी और तेज हो गई है।