महिला को अपनी इच्छा के खिलाफ गर्भ जारी रखने को मजबूर करना अधिकारों का उल्लंघन
देवभूमि न्यूज 24.इन
नई दिल्ली
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि अबॉर्शन के लिए पति की अनुमति आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने 14 सप्ताह के गर्भपात को लेकर पति द्वारा दर्ज कराए गए आपराधिक मामले में महिला को बरी कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर करना उसके अपने शरीर पर अधिकार का उल्लंघन है और यह उसके मानसिक आघात को बढ़ाने वाला कदम है।
इस मामले में महिला अपने पति से अलग रह रही थी। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि वैवाहिक कलह की स्थिति में गर्भपात का फैसला लेने के लिए महिला पूरी तरह स्वतंत्र है। अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में महिला पर भारतीय दंड संहिता की धारा 312 (गर्भपात कराना) के तहत अपराध सिद्ध नहीं होता।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चयन की आजादी व्यक्तिगत स्वायत्तता का अभिन्न हिस्सा है, और जन्म देने या न देने पर नियंत्रण सभी महिलाओं की एक बुनियादी जरूरत और अधिकार है।
एमटीपी एक्ट में पति की सहमति अनिवार्य नहीं
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) एक्ट के तहत गर्भपात के लिए पति की अनुमति लेना जरूरी नहीं है। इस कानून का मूल उद्देश्य महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को होने वाले गंभीर नुकसान से बचाव करना है।
अदालत ने कहा,
“यदि कोई महिला गर्भावस्था जारी नहीं रखना चाहती है, तो उसे ऐसा करने के लिए मजबूर करना उसके अपने शरीर पर अधिकार का उल्लंघन है और यह उसके मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होगा।”
पति के तर्क को कोर्ट ने किया खारिज
पति की ओर से यह तर्क दिया गया था कि गर्भपात के समय दंपती साथ रह रहे थे और उनके बीच कोई विवाद नहीं था, इसलिए एमटीपी एक्ट के प्रावधान लागू नहीं होंगे। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि वैवाहिक कलह को केवल अलगाव या मुकदमेबाजी तक सीमित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने माना कि महिला पहले से ही मानसिक दबाव से गुजर रही थी।
हाईकोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
अबॉर्शन के लिए पति की अनुमति आवश्यक नहीं
जन्म देने पर नियंत्रण सभी महिलाओं का बुनियादी अधिकार
गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर करना मानसिक आघात बढ़ाने वाला कदम
दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले को महिलाओं के शारीरिक स्वायत्तता और प्रजनन अधिकारों की दिशा में एक अहम और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।